आस्था और दृढ़ संकल्प के आगे शारीरिक चुनौतियां भी छोटी पड़ जाती हैं। इसका जीवंत उदाहरण दिल्ली निवासी कांवड़ यात्री राजीव हैं जिन्होंने एक पैर गंवाने के बावजूद हरिद्वार से गंगाजल लेकर दिल्ली के लिए कांवड़ यात्रा शुरू की है।
राजीव ने बताया कि करीब चार वर्ष पहले खाटू श्याम की यात्रा के दौरान उनके साथ हादसा हो गया था। हादसे में उन्हें अपना एक पैर गंवाना पड़ा। इस कठिन दौर के बाद भी उनका हौसला नहीं टूटा और उन्होंने भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था को बनाए रखी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष वह एक पैर के सहारे हरिद्वार से गंगाजल लेकर दिल्ली के लिए रवाना हुए हैं। उनका कहना है कि सच्ची श्रद्धा और मजबूत इरादों के सामने कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती। राजीव का साहस और अटूट आस्था कांवड़ यात्रा में शामिल अन्य श्रद्धालुओं के लिए भी प्रेरणा का विषय बनी हुई है। रास्ते में उन्हें देखकर श्रद्धालु उनके जज्बे की सराहना कर रहे हैं।