शहर और देहात में कई घंटे की बारिश और आंधी ने 50 से अधिक फीडरों की बिजली गुल कर दी। इसके बाद उपभोक्ताओं ने लाइनमैन, जेई और उपखंड अधिकारियों को कॉल करनी शुरू कर दी। कहीं चार घंटे तो कहीं 10 घंटे तक बिजली आपूर्ति प्रभावित रहने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
घर से लेकर अपने काम धंधों से जुड़े बिजली के काम लोग समय पर नहीं निपटा पाए। हाईटेंशन लाइन में फॉल्ट, केबल बॉक्स और जंपर फुंकने से लेकर तारों को बारिश और आंधी ने नुकसान पहुंचाया है। मंगलौर और बुग्गावाला में लोगों को 8 से 10 घंटे तक बिजली आपूर्ति की वजह से परेशानी उठानी पड़ी।
बारिश और तेज हवाओं से मंडल के 30 से अधिक बिजलीघरों पर इसका प्रभाव पड़ा। सुबह 9 बजे के बाद शहर के लेकर देहात की एक के बाद बिजली गुल होती चली गई। पहले तो उपभोक्ताओं ने करीब एक घंटे तक बिजली आने का इंतजार किया फिर उसके बाद मौसम के बिगड़े मिजाज को देखकर दो घंटे तक भी बिजली नहीं आने पर लाइनमैन से लेकर अधिकारियों को फोन करने शुरू कर दिए।
इसके बाद निगम के कर्मचारी भी बारिश और आंधी के बीच फॉल्ट को ढूंढते रहे। कहीं लाइन में फॉल्ट मिला तो कहीं केबल बॉक्स और जंपर फुंके मिले। रुड़की, झबरेड़ा, धनौरी, बुग्गावाला और मंगलौर आदि में दो से लेकर 10 घंटे तक बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस बीच लोगों को पानी की किल्लत भी झेलनी पड़ी।
ओवरहेड टैंक नहीं भरे तो लोगों को पानी नहीं मिल पाया। आवास-विकास, आदर्श नगर और सोलानीपुरम के लोगों को भी इस बीच समय से पानी की आपूर्ति नहीं हो पाई। अधीक्षण अभियंता विवेक राजपूत ने बताया कि मंडल में करीब 180 फीडर है। इनमें से 50 से अधिक फीडर बंद होने से करीब एक लाख से अधिक की आबादी को बिजली कटौती का सामना करना पड़ा।
बीटीगंज और पनियाला आदि में शुक्रवार दोपहर दो बजे के बाद आपूर्ति सुचारू करा दी गई थी। बुग्गावाला क्षेत्र में बारिश और आंधी से बिजली आपूर्ति को देर शाम तक बहाल किया गया। 33 केवी, 11केवी और एलटी लाइन को मौसम की मार से नुकसान पहुंचा है।
ऊर्जा निगम को लगी 12 लाख की चपत
मौसम के तेवर से रुड़की विद्युत वितरण मंडल के बुग्गावाला, मंगलौर और रुड़की आदि में बिजली की लाइन और उपकरणों को नुकसान पहुंचा है। एसई के मुताबिक ब्रेक डाउन, चैनल पर तार गिरने, जंपर निकलने आदि समस्याओं से ऊर्जा निगम को लाखों रुपये का नुकसान कुछ घंटे में हुआ है। लेबर से लेकर बिजली आपूर्ति समय से सुचारु कराने के लिए करीब 12 लाख रुपये खर्च हुए हैं।