आम के पेड़ों पर अच्छा बौर आने से बागवान उत्साहित हैं, लेकिन मौसम का मिजाज उन्हें चिंतित कर रहा है। मार्च के महीनों में आसमान में बादलों का डेरा, बारिश और वातावरण में नमी से किसानों की चिंता बढ़ी हुई है। बारिश और तेज हवाओं से बौर गिरने के साथ नमी से मंजरी झुलसा रोग की आशंका बढ़ जाती है।
लक्सर, सुल्तानपुर, रायसी क्षेत्र में आम के कई बाग हैं। यहां बड़े पैमाने पर आम का उत्पादन होता है। इस बार आम के पेड़ों पर अच्छी बहार आई है। मौसम मेहरबान रहा तो इस बार आम की पैदावार में बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन मौसम बागवानों की चिंता बढ़ा रहा है। मार्च के महीने में पेड़ों पर बौर आने के साथ टिकोले बनने की प्रक्रिया शुरू होती है। इन दिनों आम की फसल संवेदनशील अवस्था में रहती है।
ऐसे में बारिश और ओलावृष्टि से बौर झुलसने के साथ परागण की प्रक्रिया भी बाधित हो सकती है। कृषि विज्ञान केंद्र धनौरी के प्रभारी डॉ. पुरुषोत्तम शर्मा के अनुसार बारिश और वातावरण में अधिक नमी रहने से झुलसा रोग तेजी से फैल सकता है। इसमें बौर सूखकर काला पड़ने लगता है। इन परिस्थितियों में खर्रा रोग का भी खतरा बना रहता है। इसमें बौर पर सफेद पाउडर जैसा पदार्थ जमने लगता है और बौर झरना शुरू हो जाता है। इन परिस्थितियों में बचाव के लिए कीटनाशक और फफूंद नाशक के प्रयोग के साथ धूप और हवा के बेहतर आवागमन के लिए फालतू अथवा सूखी टहनियों को हटाने, बाग की साफ-सफाई और संतुलित खाद का इस्तेमाल करना चाहिए।
बारिश के बाद कीटों और रोग का खतरा बढ़ जाता है। अधिक नमी में झुलसा रोग की आशंका बढ़ जाती है। किसानों को कीटनाशक और फफूंद नाशक का प्रयोग करने के साथ अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। - डॉ. पुरुषोत्तम शर्मा प्रभारी, कृषि विज्ञान केंद्र, धनौरी