पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन की याद में कस्बा मंगलौर के मोहल्ला पठानपुरा में अकीदत के साथ जुलूस-ए-अजा निकाला गया। इस दौरान आयोजित मजलिस में वक्ताओं ने इमाम हुसैन की शहादत और उनके सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए उन्हें इंसानियत का सबसे बड़ा अलंबरदार बताया।
मौलाना गा़फिर अब्बास जैदी ने कहा कि इमाम हुसैन दुनिया की वह वाहिद शख्सियत हैं जिन्हें हर धर्म और मजहब के लोग अपना आदर्श मानते हैं। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन ने इंसानियत, हक और इंसाफ की रक्षा के लिए वह महान क़ुर्बानी पेश की जो कयामत तक पूरी मानवता को सही रास्ता दिखाती रहेगी। ज़ुल्म, हिंसा और नाइंसाफी के खिलाफ उन्होंने जो आवाज बुलंद की।
मौलाना जैदी ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि 28 रजब को जब क्रूर शासक यजीद ने इमाम हुसैन पर बैअत (समर्थन) का दबाव बनाया, तो दीन की हिफाजत के लिए उन्होंने मदीना छोड़ना बेहतर समझा। 02 मोहर्रम को इमाम हुसैन कर्बला पहुंचे और 10 मोहर्रम को अपने परिवार व साथियों के साथ मानवता की रक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी। मजलिस के समापन पर देश में अमन, शांति और भाईचारे के लिए विशेष दुआ की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की।
जुलूस और मजलिस के दौरान इमामबाड़ा प्रबंधक काशिफ रजा नकवी, वफा आबदी, हसनैन रजा जैदी, अली हैदर, चांद मियां आबदी, इरफान जैदी, मौलाना सिब्ते हसन, मशीर हुसैन, रजब अली आरफी और हैदर जाफरी सहित क्षेत्र के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।