ओबीसी सर्वेक्षण-2022 को लेकर समाज के लोगों की आपत्तियों और समस्याओं की सुनवाई के लिए ब्लॉक सभागार में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें लोगों ने आरक्षण को लेकर अपनी आपत्ति अधिकारियों के सामने रखी। इस दौरान प्रतिनिधियों ने एससी और एसटी आरक्षण को लेकर भी आपत्ति दर्ज करानी चाही जिन्हें अधिकारियों ने मौके पर ही खारिज कर दिया।
बुधवार को रुड़की ब्लॉक सभागार में ओबीसी सर्वेक्षण के लिए गठित किए गए एकल सदस्यीय समर्पित आयोग के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश बीएस वर्मा के नेतृत्व में जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान पूर्व प्रधान सिफटेन अली, मुनीष गौड़, युधिष्ठिर, उस्मान आदि ने आरक्षण से संबंधित सवाल पूछे और आरक्षण यूपी की तर्ज पर 27 फीसदी दिए जाने की मांग की। उन्होंने वोटर लिस्ट में जो ओबीसी के मतदाता छूट गए हैं उन्हें भी शामिल कर सर्वेक्षण करवाने का सुझाव भी दिया।
अधिकारियों ने बताया कि इन शिकायतों और सुझाव की आयोग रिपोर्ट बनाकर सुप्रीम कोर्ट को सौंप देगा। सर्वेक्षण के लिए जो टीम घर-घर जाएगी, जनप्रतिनिधि उनका सहयोग करें ताकि सर्वेक्षण का काम समय से पूरा हो सके। इस दौरान एकल सदस्यीय समर्पित आयोग के सदस्य सचिव ओमकार सिंह, पंचायती राज अपर निदेशक मनोज तिवारी, अपर मुख्य अधिकारी हिमानी जोशी, डीपीआरओ अतुल प्रताप सिंह, बीडीओ शिव प्रसाद थपलियाल, रुड़की एडीओ पंचायत बनेश कुमार, नारसन एडीओ पंचायत धर्मपाल सिंह तेजवान, वीडीओ कृष्णपाल सैनी आदि मौजूद रहे।
पहले जनगणना करें फिर करें ओबीसी का सर्वेक्षण
जनसुनवाई के दौरान रसूलपुर के पूर्व प्रधान आबिद ने आयोग के अध्यक्ष के सामने सुप्रीम कोर्ट, बांबे हाईकोर्ट और मध्य प्रदेश कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए अपना तर्क रखा। उनका कहना था कि आयोग ओबीसी को सही आरक्षण देने के लिए जो सर्वेक्षण कर रहा है उसमें कमियां है। ये सर्वेक्षण 2011 की जनगणना के आधार पर हो रहा है। इस गणना के बाद वर्ष 2015 में चुनाव हो चुका है। इसके बाद वर्ष 2021 में जनगणना होनी थी। सरकार इस गणना को नहीं करवा सकी। पहले जनगणना होनी चाहिए तभी ओबीसी को सही ढंग से आरक्षण मिल सकेगा। यदि सरकार या निर्वाचन आयोग वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर ही चुनाव करवाना चाहती है तो जनगणना का दूसरा चक्र लागू कर चुनाव कराए। उत्तर-प्रदेश में दूसरे चक्र के आधार पर ही चुनाव हुए हैं जबकि हरिद्वार जिले में सरकार चौथे चक्र के आधार पर चुनाव कराना चाहती है जो सरासर गलत है। इस पर आयोग अध्यक्ष ने बताया कि वे केवल सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार ही सर्वेक्षण कर रहे हैं।