सरकार ने सीबीएसई ने सभी पब्लिक स्कूलों को नये सत्र से एनसीईआरटी की किताबें लगाने के निर्देश दिए हैं। यही वजह है कि नये सत्र में अभिभावक खर्व को लेकर कुछ राहत महसूस कर रहे हैं।
फरवरी माह में केंद्र सरकार के निर्देश पर सीबीएसई ने सभी पब्लिक स्कूलों को मेल भेजकर नये सत्र से एनसीईआरटी की किताबें लगाए जाने के निर्देश दिए थे। साथ ही किताबों के लिए इंडेंट भी मांगा था। सीबीएसई से मान्यता प्राप्त अधिकांश स्कूलों ने किताबों के लिए इंडेंट भेज दिया है। इसके साथ ही किताबों की सूची भी तैयार कर संबंधित दुकानदारों को भेज दी है। कुछ स्कूलों को छोड़ दें तो अधिकांश पब्लिक स्कूलों ने अपने यहां पर एनसीईआरटी की किताबें लगा ली है। आईआईटी रुड़की परिसर स्थित आदर्श बाल निकेतन की बात करें तो इस स्कूल ने पूरा कोर्स ही एनसीईआरटी की किताबों का लगा लिया है। पिछले सत्र में इस स्कूल में कक्षा-1 की किताबों का कोर्स 1500 रुपये है। लेकिन इस सत्र में एनसीईआरटी की किताबें लग जाने के कारण यह कोर्स घटकर मात्र 490 रुपये रह गया है। केवल एक किताब ही बाहर की है। अन्य स्कूलों ने भी काफी किताबें एनसीईआरटी की लगा ली है। एक नामी स्कूल की पिछले साल कक्षा-1 की किताबें ढाई हजार रुपये(कॉपी शामिल नहीं है) की थी। जो इस अब घटकर 1400 रुपये की रह गई हैं। हालांकि अभी भी इस स्कूल ने एनसीईआरटी के साथ ही प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबें लगाई हुई है। लेकिन इसके बाद भी अभिभावकों को बच्चों का कोर्स खरीदने में काफी राहत मिलेगी।
कुछ स्कूल आदेशों को दरकिनार कर रहे मनमानी
शहर और देहात क्षेत्र में करीब दो दर्जन से अधिक सीबीएसई के सीनियर सेकेंडरी पब्लिक स्कूल हैं। अधिकांश स्कूलों ने सीबीएसई के फरमान को भले ही पूरी तरह न माना हो, लेकिन उन्होंने काफी किताबें एनसीईआरटी की लगा ली हैं। हालांकि प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबें भी उन्होंने पूरी तरह से नहीं छोड़ी हैं। लेकिन कुछ स्कूल तो ऐसे हैं जो सीबीएसई के आदेश को दरकिनार एनसीईआरटी किताबें नहंी लगा रहे हैं। वह प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबें लगाकर मनमानी पर उतारू हैं और अभिभावकों की जेबें काटने पर तूले हैं। शिक्षा विभाग से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि ऐसे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई तय है।
केंद्रीय विद्यालयों के बराबर हो जाएगा किताबों का खर्च
सीबीएसई से मान्यता प्राप्त पब्लिक स्कूल यदि सीबीएसई की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें तो केंद्रीय विद्यालयों के बराबर ही पब्लिक स्कूलों की किताबों का खर्च हो जाएगा। जिससे अभिभावकों को बड़ी राहत मिल सकती है।
केंद्रीय विद्यालय में कक्षावार किताबों का खर्च
कक्षा रुपये
एक से दो 150
तीन से पांच 200
छह से आठ 500
नौ 800
10 900
11 से 12 1000
किताबों का ऑर्डर पूरा करना होगा चुनौती
सीबीएसई की ओर से एनसीईआरटी किताबों को स्कूलों में लगाने का फरमान जारी किया जा चुका है। स्कूलों से इसके लिए किताबों का ऑर्डर भी मांग लिया गया है। लेकिन स्कूलों को नये सत्र के शुरू होने के साथ कैसे यह किताबें उपलब्ध हो पाएंगी यह एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि एनसीईआरटी पहले ही डिमांड के मुताबिक किताबें उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। पब्लिक स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें अनिवार्य रुप से लगाए जाने के आदेश के बाद किताबों की डिमांड 15 गुना से भी ज्यादा हो चुकी है।