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कोरोना की लहर, फिर भी जांच को अनुमति का इंतजार

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रुड़की। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच एक ओर जहां सरकारी संसाधन नाकाफी साबित हो रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर विभागीय अड़चनों के चलते निजी लैबों में भी लोगों की जांच नहीं हो पा रही है। रुड़की में पूरा सेटअप लगाने के बाद एक लैब को राज्य सरकार की अनुमति का इंतजार है तो हाल ही में जांच की दर कम किए जाने पर कोरोना की जांच कर रही एकमात्र निजी लैब ने जांच से हाथ खड़े कर दिए हैं। लैब संचालक का कहना है कि नई दर पर जांच का खर्च ही नहीं निकल पाएगा। लिहाजा कोविड-19 की सैंपलिंग रोक दी गई है।
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रुड़की और आसपास के क्षेत्रों के सैकड़ों गांवों में कोरोना जांच के संसाधनों की बात करें तो यहां अभी तक सिविल अस्पताल और कुछ सीएचसी सेंटरों पर ही जांच की जा रही है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग ने कुछ टीमों का गठन किया है। कुल मिलाकर रोजाना एक हजार के आसपास ही टेस्टिंग हो पा रही है। इनमें भी अधिकांश किट बॉर्डर पर खर्च हो रही है। ऐसे में स्थानीय लोगों की जांच के लिए संसाधन मजबूत नहीं हैं। निजी लैब में केवल कौशिक पैथोलॉजी को ही कुछ दिनों पहले काफी इंतजार के बाद टेस्टिंग की अनुमति मिली।
पैथोलॉजी के संचालक डॉ. एसके कौशिक ने बताया कि केंद्र के बाद राज्य सरकार की अनुमति लेने में लंबा समय लगा। करीब तीन महीने में अनुमति मिलने पर टेस्टिंग शुरू की गई, लेकिन अब सरकार ने रेट इतने कम कर दिए कि खर्च निकलना मुश्किल हो गया। लैब में रोजाना 15 से 20 सैंपल लिए जा रहे थे। अभी तक आरटीपीसीआर टेस्ट के लिए 1500 रुपये लिए जा रहे थे, जिसमें टेस्टिंग का ही खर्च करीब 1200 रुपये आ रहा था। अब टेस्टिंग की दरें कम कर दी गई हैं। इसके चलते जांच संभव नहीं है। इसके चलते बृहस्पतिवार से सैंपलिंग बंद कर दी गई है। उन्होंने कहा कि जल्द ही उम्मीद है कि सरकार कोई न कोई रास्ता निकालेगी। तब फिर से टेस्टिंग शुरू की जाएगी। दूसरी ओर, नई कचहरी के सामने दिल्ली की कंपनी ने लैब के लिए मशीनें लगाई हैं। साथ ही दो महीने की मशक्कत के बाद केंद्र सरकार से अनुमति हासिल कर ली है, लेकिन राज्य सरकार से अनुमति नहीं मिली है। संवाद
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रुड़की में एक प्राइवेट लैब को कोरोना की जांच के लिए केंद्र सरकार से अनुमति मिलने जानकारी है। जल्द ही राज्य सरकार से भी अनुमति जारी हो जाएगी।
-डॉ. एसके झा, सीएमओ, हरिद्वार
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करीब 90 लाख आ रहा लैब का खर्च
नई कचहरी के पास दिल्ली की मोलिक्यूलर बेस्ड टेस्टिंग की एक कंपनी ने आरटीपीसीआर जांच के लिए लैब तैयार की है। कंपनी के लोगों का कहना है कि लैब में मशीनों आदि का करीब 90 लाख खर्च आ चुका है। केंद्र सरकार से टेस्टिंग के लिए अनुमति भी मिल गई है। अब राज्य सरकार से अनुमति मिलती है तो टेस्टिंग शुरू की जाएगी।
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