रुड़की। जिला उपभोक्ता फोरम ने अपने एक फैसले में माना कि बीमा कंपनी मेडिकल क्लेम के दावे को यह कहकर निरस्त नहीं कर सकती है कि उपभोक्ता पहले से बीमार था। फोरम ने टेक्निकल आधार पर मेडिकल क्लेम के दावे को निरस्त करने की कार्रवाई को उपभोक्ता सेवा में कमी माना है। फोरम ने कंपनी को बीमित उपभोक्ता के इलाज में खर्च हुए 3,18,309 रुपये ब्याज सहित एक माह में अदा करने का फैसला सुनाया है।
अधिवक्ता श्रीगोपाल नारसन ने बताया कि फोरम के अध्यक्ष कंवर सैन, सदस्य अंजना चड्ढा व विपिन कुमार ने उपभोक्ता ममता सिंह व उनके पति हरेंद्र सिंह की शिकायत पर यह फैसला दिया है। उन्होंने बताया कि प्रीत विहार गणेशपुर रुड़की निवासी हरेंद्र सिंह ने कर्नाटक बैंक में अपना खाता खुलवाया हुआ है। इसी नाते बैंक ने उनका व उनके परिवार का पांच लाख बीमित राशि का जनरल इंश्योरेंस कराया था। जिसमें हरेंद्र, उनकी पत्नी ममता सिंह व पुत्र आर्यन बीमित थे। बीमित अवधि में ममता सिंह हृदय की बीमारी से ग्रसित हो गई और उसे मेट्रो हॉस्पिटल में भर्ती होकर अपना उपचार कराना पड़ा। इसमें उनके 3,18,309 रुपये खर्च हो गए। उन्होंने इस राशि के लिए बीमा कंपनी में क्लेम किया। मगर बीमा कंपनी ने बीमा धारक को पहले से बीमार बताकर उनका मेडिकल क्लेम दावा निरस्त कर दिया। मजबूर होकर उन्होंने उपभोक्ता फोरम की शरण ली। जहां सभी पक्षों को सुनने के बाद फोरम ने विधिक सिद्धांत प्रतिपादित किया कि टेक्निकल आधार पर मेडिकल क्लेम निरस्त करना गलत है। इसी आधार पर उपभोक्ता के हक में उक्त फैसला सुनाया गया। उन्होंने बताया कि फोरम ने कंपनी को बीमित उपभोक्ता के इलाज में खर्च हुए 3,18,309 रुपये मय ब्याज एक माह में अदा किए जाने का फैसला सुनाया है।