रुड़की तहसील के गांव शिकारपुर निवासी दीपक की सोमवार को चीनी मांझे की चपेट में आने से हुई मौत के बाद क्षेत्र में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि प्रतिबंध के बावजूद दुकानों पर चोरीछिपे चीनी मांझे की बिक्री चिंता का विषय है। पतंग उड़ाने के शौक के नाम पर बिक रहा यह मांझा अब राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहा है। लोगों का कहना है कि एकजुट होकर जानलेवा मांझे के खिलाफ सड़क पर उतरकर आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटना होगा।
आरिफ, कामिल, कलीम खान, अनुज कुमार, राजेश कुमार, मौलाना नवाब और और मौ. मुजस्सम ने प्रशासन से चीनी मांझा बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि मांझे की चपेट में आने से आए दिन लोग घायल होते हैं। इसके अलावा पक्षियों के लिए भी यह मांझा बेहद खतरनाक है। लोगों का कहना है कि दुकानदारों को मुनाफे के बजाय लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। सभासद अजीत पटेल ने कहा कि चाइनीज मांझा बेचकर मुनाफा कमाने वालों का सामाजिक स्तर पर भी विरोध होना चाहिए। दुकानदारों को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए प्रतिबंधित मांझे की बिक्री से पूरी तरह बचना चाहिए।
दुकानदार खुद समझें जिम्मेदारी
शिकारपुर निवासी दीपक की मौत बेहद दुखद है। प्रतिबंधित और विदेशी मांझे की बिक्री रोकने के लिए लोगों को आगे आना होगा। इसकी लगातार हो रही बिक्री लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। -मुफ्ती रियासत अली, पूर्व अध्यक्ष जमीयत उलेमा-ए-हिंद
चीनी मांझा बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है। मुनाफे के लिए लोगों की जान से खिलवाड़ किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। आमजन को भी ऐसे मांझे की बिक्री का खुलकर विरोध करना चाहिए।-नसीम अहमद, नगर पंचायत अध्यक्ष, लंढौरा
एक युवक की मौत ने चीनी मांझे के खतरे को फिर उजागर कर दिया है। प्रतिबंध के बावजूद इसकी बिक्री समझ से परे है। प्रभावी रोक के लिए सख्त कार्रवाई जरूरी है। लोगों को मांझा बेचने और खरीदने वालों की गुप्त सूचना पुलिस को देनी चाहिए। -रामकुमार शर्मा, चमन लाल महाविद्यालय, अध्यक्ष
चीनी मांझा मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि मौत का सामान बन चुका है। इसकी चपेट में राहगीर और वाहन चालक गंभीर हादसों का शिकार हो रहे हैं। प्रशासन को कार्रवाई के साथ जागरूकता अभियान भी चलाना चाहिए। प्रत्येक नागरिक को इसके खिलाफ आवाज उठानी होगी। -बालेश्वर कुमार, शिक्षक