माह-ए-रमजान के पहले रोजे पर अकीदतमंदों में उत्साह देखने को मिला। रोजेदारों ने सुबह सहरी करने के बाद दिनभर रोजा रखा और शाम को अकीदत के साथ इफ्तारी की। मस्जिदों में चांद रात से शुरू हुई तरावीह की नमाज पहले रोजे के बाद भी अदा की गई जो पूरे माह जारी रहेगी। इफ्तारी के बाद रात करीब आठ बजे बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने मस्जिदों में पहुंचकर तरावीह की नमाज अदा की। इस दौरान कुरआन ख्वानी भी की गई। कई घरों में भी मोमिनों ने कुरआन शरीफ का पाठ शुरू किया। नमाज के बाद उलेमाओं ने रोजे के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रमजान का महीना इबादत और फजीलत का महीना है। उन्होंने कहा कि रमजान केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है बल्कि यह सभी बुराइयों से तौबा करने का अवसर है। उलेमाओं ने लोगों को आंख, कान और जुबान सहित शरीर के हर अंग का रोजा रखने की नसीहत दी। रमजान की आमद पर लोगों ने एक-दूसरे को मुबारकबाद दी।