फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अब फैमिली डॉक्टर की भूमिका निभाएंगे शिक्षक

विज्ञापन
विज्ञापन
स्कूल में शिक्षा देने के साथ ही अध्यापक अब बच्चों के फैमिली डॉक्टर बनकर भी काम करेंगे। आयुष्मान भारत के अंतर्गत स्कूल हेल्थ प्रोग्राम बनाकर प्रधानाचार्यों और अध्यापकों को इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा। अध्यापक बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलाव और अन्य गतिविधियों को भांपकर पता चलाएंगे कि बच्चा किसी बीमारी से ग्रसित तो नहीं हैं। इसके बाद बच्चे का हेल्थ कार्ड बनाकर बच्चे का निशुल्क इलाज कराया जाएगा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने संयुक्त रूप से आयुष्मान भारत के तहत स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम की शुरुआत की है। इसके तहत जिले के कक्षा एक से 12वीं तक राजकीय एवं राजकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को योजना में शामिल किया जाएगा। नारसन ब्लॉक संयोजक एसके सिद्दीकी ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य संबंधित बीमारियों से मुक्त करना है। डायट अपने माध्यम से प्रधानाचार्यों और अध्यापकों को प्रशिक्षण दिलाएगा। इसके बाद स्कूल के बच्चों का हेल्थ कार्ड बनाया जाएगा। इस कार्ड के माध्यम से निशुल्क इलाज कराया जाएगा।
विज्ञापन

हेल्थ एंड वेलसेन एंबेसडर बनेंगे अध्यापक
सबसे पहले डायट पांच मास्टर ट्रेनर बनाएगा और उन्हें स्वास्थ्य विभाग की टीम प्रशिक्षण देगी। इसके बाद ये मास्टर ट्रेनर हर स्कूल के प्रधानाचार्यों को प्रशिक्षण देंगे। फिर ये प्रधानाचार्य अपने स्कूल में एक पुरुष और एक महिला अध्यापक को हेल्थ एंड वेलसेन एंबेसडर बनाकर उन्हें प्रशिक्षण दिलाएंगे। ये हेल्थ एंड वेलसेन एंबेसडर अपने स्कूल के बच्चों की मानसिक और शारीरिक मनोदशा पढ़ेंगे। यदि कोई बच्चा कुछ दिन से गुमशुम है या ज्यादा आक्रामक हो रहा है। वह अन्य बच्चों से घुल मिलकर नहीं रह रहा है या फिर बच्चे में बीमारी जैसे कुछ लक्षण मिलते हैं तो अध्यापक उसका स्वास्थ्य कार्ड बनाएंगे और इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को देंगे।
एक बच्चा बनेगा हेल्थ मैनेजर
हेल्थ एंड वेलसेन एंबेसडर अपने स्कूल की हर कक्षा के एक होनहार बच्चे को हेल्थ मैनेजर बनाएंगे। क्योंकि अक्सर देखने में आता है कि कुछ बच्चे अपनी समस्या को अध्यापकों को बताने में हिचकिचाते हैं। ऐसे में अध्यापक हर कक्षा में एक बच्चे को हेल्थ मैनेजर बनाएंगे ताकि वह बच्चों के बीच में रहकर उनकी समस्या समझ सके और अध्यापकों को बता सके।
विज्ञापन

गृह विज्ञान के टीचर को मिलेगी प्राथमिकता
हर स्कूल में एक पुरुष और एक महिला टीचर को हेल्थ एंड वेलसेन एंबेसडर बनाना है। जिला एवं प्रशिक्षण संस्थान के निर्देशानुसार स्कूल के शारीरिक शिक्षा और गृह विज्ञान के अध्यापक को एंबेसडर बनाने में वरीयता दी जाएगी। साथ ही टीचर में व्यावारिकता का गुण होना बेहद जरूरी है। टीचर बच्चों के साथ मिलनसार व्यवहार रखते हो और उनकी बातों को समझ सकते हो।
शुरू हो चुका है प्रशिक्षण कार्यक्रम
ब्लॉक स्तर पर प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को प्रशिक्षण देने का काम शुरू हो गया है। नौ और 10 मार्च को प्रधानाचार्यों को प्रशिक्षण दिया गया है। 12-13 मार्च को कुछ ब्लॉकों में शिक्षकों को भी प्रशिक्षण दिया जा चुका है। अब 14-15 मार्च को अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाना है। फिलहाल कोरोना के मद्देनजर प्रशिक्षण ऑनलाइन दिया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें