प्रशासन और नगर निगम की संयुक्त टीम ने बुधवार को गणेशपुर पहुंचकर विवादों में आई तालाब की जमीन की पैमाइश की। करीब 30 बीघा इस भूमि का सीमांकन करने में टीम के पसीने छूट रहे हैं। इसी जमीन पर लाखों की लागत से तैयार पानी की टंकी भी है। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। इससे पहले भी कई बार भूमि की पैमाइश और जांच हो चुकी है।
शहर के गणेशपुर में 30 बीघा भूमि ऐसी है जो तालाब के अलावा आबादी और बंजर में भी शामिल है। बताया जा रहा है कि सम्मिलित रकबे के कारण और कई दस्तावेजों में अलग-अलग जानकारी होने के चलते यह भूमि कई सालों से विवादों के घेरे में हैं। बताया जा रहा है कि इस भूमि के संबंध में ऋषिपाल बनाम राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल की गई है।
इसमें बताया गया है कि जल संस्थान की ओर से निर्मित पानी की टंकी गलत जगह पर बनी है। इसके अलावा भी इस जमीन से जुड़े कई तथ्य हैं। हाल ही में हाईकोर्ट ने इस मामले में जमीन काे लेकर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। इसे लेकर बुधवार को प्रशासन और नगर निगम की संयुक्त टीम ने कई घंटे धूप में खड़े होकर इस जमीन की पैमाइश की।
इस दौरान आसपास के घरों के लोग भी बाहर निकल आए। लोगों को यह जानने की उत्सुकता थी कि टीम किस कितने क्षेत्र को तालाब और बंजर आदि में मानकर चल रही है। इस दौरान नायब तहसीलदार और निगम के राजस्व अधिकारी समेत कई लोग मौजूद रहे।
इस जमीन के आवंटन को लेकर कई बार गरमाई राजनीति
नगर निगम ने गणेशपुर की इस जमीन को सीवरेज पंपिंग स्टेशन और ओवरहेड टैंक के निर्माण के लिए एडीबी व जल संस्थान को दिया गया था। करीब तीन साल पहले इस जमीन पर उस समय अचानक राजनीति गरमा गई थी। जब पूर्व मेयर गौरव गोयल ने पूर्व पार्षदों की शिकायत का हवाला देते हुए तालाब के काफी हिस्से पर अतिक्रमण की बात कही थी।
इसके बाद पार्षद प्रतिनिधियों ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा था कि संबंधित जमीन के मालिकाना हक नगर निगम के पास नहीं है। यह जमीन गणेशपुर में रह रहे लोगों के पूर्वजों की है। साथ ही निगम पर गलत तरीके से यह जमीन एडीबी और जल संस्थान को देने का आरोप लगाया था।