IIबैंक के एजेंट ने चालक को घर के लिए ऋण दिलाने का दिया था झांसा
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Iदस्तावेज लेकर नहीं दिलाया ऋण, किसी और के नाम करा दिया लोन
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घर खरीदने के लिए ऋण दिलाने का झांसा देकर बैंक के एक एजेंट ने ई-रिक्शा चालक से दस्तावेज लेकर किसी और के नाम पर 40 लाख का ऋण करा दिया। बैंक की ओर से रिक्शा चालक के पास किश्त जमा करने के लिए कॉल और मैसेज आए तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। चालक ने एजेंट और बैंक मैनेजर पर मिलीभगत कर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाते हुए तहरीर दी है।
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Iगंगनहर कोतवाली क्षेत्र स्थित कृष्णानगर निवासी अनिल कुमार ई-रिक्शा चालक है। अनिल कुमार ने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि करीब एक साल पूर्व उनकी मुलाकात कृष्णानगर में किराये पर रहने वाले एक बैंक के एजेंट से हुई थी। उससे उन्होंने घर के लिए ऋण लेने की बात की थी। एजेंट ने रुड़की के एक प्राइवेट बैंक से ऋण दिलाने की बात कही थी। साथ ही ऋण के लिए 40 हजार का खर्च आने की बात कही थी।
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Iइसके बाद उन्होंने एजेंट को सभी दस्तावेज और 40 हजार रुपये दे दिए थे लेकिन कई माह बीतने के बाद भी एजेंट ने ऋण नहीं दिलाया। उन्होंने अपने दस्तावेज वापस मांगे तो वह नहीं दिए और किराये का कमरा भी छोड़ दिया। उन्होंने एजेंट के मोबाइल पर कॉल की तो वह बंद आया। बैंक जाकर जानकारी ली तो पता चला कि उनका कोई ऋण नहीं हुआ है।
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Iअनिल कुमार ने बताया कि अब एक साल बाद बैंक की ओर से उनके पास कॉल आई और बताया कि उनके दस्तावेजों पर 40 लाख का ऋण लिया गया है। एक साल से ऋण की किश्त भी जमा नहीं की गई है। बैंक से आई काॅल को सुनकर अनिल के पैरों तले जमीन खिसक गई। वह आननफानन बैंक पहुंचे और मामले की जानकारी ली।
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Iवहां पता चला कि उनके दस्तावेजों पर किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर ऋण दिया गया है। उन्होंने किस व्यक्ति के नाम ऋण दिया गया है, उसकी जानकारी देने की बात कही तो बैंक मैनेजर ने इन्कार कर दिया। अनिल ने आरोप लगाया कि एजेंट ने बैंक मैनेजर से मिलीभगत कर उनके दस्तावेजों पर किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर ऋण दिया है। उन्होंने पुलिस से कार्रवाई की मांग की है। एसएसआई जहांगीर अली ने बताया कि तहरीर के आधार पर जांच कराई जा रही है।I