रुड़की/पिरान कलियर। अमृतसर से देहरादून के बीच चलने वाली लाहौरी एक्सप्रेस मंगलवार को दोस्ती का पैगाम लेकर रुड़की पहुंची। पिरान कलियर में दरगाह साबिर पाक के सालाना उर्स में शिरकत करने के लिए 171 पाकिस्तानी जायरीनों का जत्था रुड़की आया। कड़ी सुरक्षा के बीच छह रोडवेज बसों से उन्हें कलियर पहुंचाया गया। साबरी गेस्ट हाउस में ठहरे पाक जायरीन हफ्ते भर चलने वाली तमाम रस्मों में शामिल होंगे।
कलियर उर्स में हर साल विदेशों तक से जायरीन आते हैं। पाकिस्तान से 200 जायरीनों का कोटा तय किया गया है। इस बार 171 जायरीन आए हैं। ये जायरीन समझौता एक्सप्रेस से लाहौर से अटारी बॉर्डर पहुंचे वहां से अमृतसर से लाहौरी एक्सप्रेस से मंगलवार को करीब सवा तीन घंटे की देरी से सुबह नौ बजे रुड़की रेलवे स्टेशन पहुंचे। यहां पहले से मुस्तैद मेला एसपी मदन सिंह फर्सवाण समेत मेलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने उनकी अगवानी की । कड़ी सुरक्षा के बीच रोडवेज बसों से उन्हें कलियर पहुंचाया गया। जहां साबरी गेस्ट हाउस में उन्हें ठहराया गया है। जायरीनों को रुड़की से कलियर पहुंचाने के दौरान सीओ कुलदीप असवाल, गंगनहर कोतवाली प्रभारी जवाहर लाल, सिविल लाइंस कोतवाली के कार्यवाहक प्रभारी गोविंद कुमार, एसओ कलियर व मेला प्रभारी महेश जोशी आदि शामिल रहे। टीम लीडर रियाज साबरी ने बताया कि दरगाह पर जियारत व चादरपोशी समेत अलग अलग रस्मों में शामिल होने के बाद 27 दिसंबर की शाम जायरीन अपने वतन पाकिस्तान लौट जाएंगे।
जायरीनों के इंतजार में घंटों ठिठुरे अफसर सिपाही
लाहौरी एक्सप्रेस मंगलवार को लगभग सवा तीन घंटे देर से रुड़की पहुंची। जिसके चलते अफसरों और पुलिसकर्मियों को कई घंटे ठिठुरना पड़ा। ट्रेन का रुड़की पहुंचने का समय सुबह 05:40 है। जिसे देखते हुए एलआईयू, डॉग स्क्वायड, बम निरोधक दस्ता समेत बस लेकर पहुंचे रोडवेज कर्मचारी रात दो बजे ही स्टेशन पहुंच गए थे। मेला एसपी एमएस फर्सवाण समेत एलआईयू और स्पेशल ब्रांच के अधिकारी अल सुबह स्टेशन पहुंच गए थे। मेलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल जायरीनों के आने से कुछ देर पहले पहुंचे।
पाक के इन शहरों से आएं हैं जायरीन
पाकिस्तान के कराची, लाहौर, हैदराबाद, इस्लामाबाद, रावलपिंडी, फैसलाबाद, साइवाल, पेशावर, पाक पट्टन आदि शहरों के जायरीन कलियर पहुंचे।
कलियर पहुंचते ही चूम ली हिंदुस्तानी सरजमीं
शादाब अली
पिरान कलियर। दरगाह साबिर पाक के 747वें सालाना उर्स में शिरकत करने पहुंचे पाकिस्तानी जायरीनों ने पहला कदम रखते ही हिंदुस्तानी सरजमीं को चूम लिया। साबिर पाक का रोजा देखकर कई बुजुर्ग जायरीनों की आंखें छलर्क आइं। उम्र के इस पड़ाव में ही सही आखिरकार उनकी दिली तमन्ना पूरी हो गई।
सालाना उर्स के दौरान साबिर पाक की जियारत करने की पाकिस्तानी जायरीनों में साल भर चाहत रहती है। जायरीनों के जत्थे की अगुवाई कर रहे रियाज साबरी के मुताबिक पाकिस्तान सरकार की ओर से उर्स से छह महीने पहले आवेदन मांगे जाते हैं। कुल 200 जायरीनों का कोटा तय होने के बावजूद बड़ी तादाद में जायरीन इसके लिए आवेदन करते हैं। इसके बाद लॉटरी सिस्टम से जायरीनों के नाम तय किए जाते हैं। मंगलवार को कलियर पहुंचे जायरीनों में दरगाह के जियारत की चाह इस कदर दिखाई दी कि साबरी गेस्ट हाउस में पहुुंचकर गुसल करते ही वह दरगाह की तरफ खिंचे चले गए।
हिंदुस्तान के प्रति बदला पाकिस्तानी आवाम का नजरिया
मेहताब आलम
रुड़की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व पाकिस्तान के वजीरे आला नवाज शरीफ की मुलाकात उसके के बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की यात्रा से पाकिस्तानी आवाम में हिंदुस्तान को लेकर नजरिया बदला है। हाल के दिनों में पाकिस्तानी जनता के बीच हिंदुस्तान की दोस्ताना छवि बनी है। जायरीन के तौर पर भारत पहुंचे पाक नागरिकों ने अमर उजाला से बातचीत में खुद इसकी तस्दीक की।
पाकिस्तानी नागरिकों की मानें तो 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद निजाम बदलने पर हिंदुस्तान को लेकर तमाम तरह के सवालात उनके मन में उठे। मगर पिछले कुछ दिनों से हिंदुस्तान पाकिस्तान के रिश्तों में एक ठहराव आया है। जत्थे की अगुवाई कर रहे पाकिस्तान गुजरावाला निवासी रियाज साबरी कहते हैं कि नेताओं का एक बयान दोनों मुल्कों के बीच खटास पैदा कर देता है। इसी तरह बेहतर रिश्तों की नींव रखने के लिए भी उनका एक कदम काफी होता है।
उन्होंने बताया कि पिछले दिनों मोदी शरीफ की मुलाकात से एक बार फिर दोनों मुल्कों के बीच दूरियां मिटने की शुरूआत हुई है। इसके बाद भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की पाकिस्तान यात्रा से तो हालात और ज्यादा बदलें हैं। एक दूसरे की तरफ दोस्ती का हाथ बढने से पाकिस्तानी नागरिकों में खुशी है। दोनों मुल्कों के बीच बेहतर रिश्तों का फायदा आवाम को ही मिलता है। जबकि तनातनी का खामियाजा भी किसी न किसी रूप में दोनों मुल्कों की जनता को ही झेलना पड़ता है।
बिहार चुनाव व असहिष्णुता के मुद्दे से वाकिफ
अपने देश ही नहीं भारत के ज्वलंत मुद्दों पर भी वहां के लोगों की पूरी नजर रहती है। दिल्ली और बिहार चुनाव के साथ ही असहिष्णुता के मुद्दे पर भी पाकिस्तानी नागरिकों में हलचल रही। पाकिस्तानी नागरिकों ने बताया कि सोशल मीडिया और इलेक्ट्रानिक मीडिया से वे यहां के हालातों से वाकिफ रहते हैं।
सोशल मीडिया मिटा रही सरहद की दूरियां
सीमा से लेकर राजनीतिक हालात समय समय पर बदलते रहे हैं, मगर सोशल मीडिया दोनों मुल्कों के बीच सरहद पाटने का काम कर रहा है। जायरीनों के जत्थे में शामिल कई नौजवानों ने बताया कि फेसबुक पर उनके सैकड़ों की तादाद में हिंदुस्तानी दोस्त हैं। इनमें कई ऐसे दोस्त भी हैं जिनसे सुबह शाम हैलो भी होती है।
आज मनाई जाएगी छोटी रोशनी, उमड़ेगा सैलाब
पिरान कलियर। साबिर पाक के 747 वें सालाना उर्स में बुधवार को हजरत गौस पाक रहमतुल्ला अलैहि की छोटी रोशनी मनाई जाएगी। इस रस्म में बड़ी संख्या में जायरीनों के पहुंचने की संभावना है। छोटी रोशनी मनाने के लिए अकीदतमंद साबिर पाक की दरगाह पर मत्था टेककर मन्नतें मांगते हैं। जायरीनों के लिए छोटी रोशनी का विशेष महत्व है। साबिर पाक उर्स के मौके पर 11 रबीउलअव्वल यानि बुधवार को सज्जादानशी शाह मंसूर एजाज साबरी व गद्दीनशी शाह अली एजाज साबरी गौस पाक रहमतुल्ला अलैहि की छोटी रोशनी की रस्म अदा कराएंगे।
उर्स में अदा होने वाली खास रस्में -
23 दिसंबर (11 रबिउल अव्वल)- छोटी रोशनी
24 दिसंबर (12 रबिउल अव्वल)- बड़ी रोशनी
25 दिसंबर (13 रबिउल अव्वल)- कुल शरीफ
26 दिसंबर (14 रबिउल अव्वल)- गुशल शरीफ
27 दिसंबर (15 रबिउल अव्वल)- नातिया मुशायरा