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Roorkee News: अंतरराज्यीय बाइक चोर गिरोह का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार

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पुलिस ने अंतरराज्यीय बाइक चोर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गिरोह के तीन बदमाशों को गिरफ्तार किया है। साथ ही चोरी 18 बाइकें भी बरामद की हैं। एक आरोपी फरार चल रहा है। पुलिस ने चारों पर केस दर्ज कर लिया है। साथ ही गिरफ्तार तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है। वहीं, पुलिस फरार आरोपी की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
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मंगलवार को गंगनहर कोतवाली में एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने बाइक चोर गिरोह का खुलासा किया। एसएसपी ने बताया कि बाइक चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के जिलेभर की पुलिस को चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में मंगलवार सुबह गंगनहर कोतवाली पुलिस को सूचना मिली कि लाठरदेवा-पनियाला तिराहे के पास दो संदिग्ध युवक बिना नंबर प्लेट की बाइक के साथ खड़े हैं।



सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को पकड़कर पूछताछ की लेकिन वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। इस पर पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो पता दोनों ने चोरी की बाइक होना स्वीकार किया। पुलिस दोनों को पकड़कर कोतवाली ले आई और गहनता से पूछताछ की। पूछताछ में सचिन ने बताया कि मोनू उसके बचन का दोस्त है।
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मोनू के जरिए उसकी मुलाकात गौरव से हुई थी। इसके बाद उनके ग्रुप में अंकित की एंट्री हुई थी। एसएसपी ने बताया कि चारों ने अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए बाइक चोरी करने की योजना बनाई थी। इसके बाद चारों ने मिलकर हरिद्वार, रुड़की, सहारनपुर और हरियाणा से बाइक चोरी की थी। एसएसपी ने बताया कि मोनू, सचिन और गौरव की निशानदेही पर पुलिस ने शक्ति विहार कॉलोनी, रुड़की में एक खंडहर से चोरी की 16 बाइकें बरामद कीं। आरोपी अंकित का कुछ पता नहीं चल पाया है।



एसएसपी ने बताया कि मोनू और सचिन निवासी टोडा कल्याणपुर, रुड़की और गौरव निवासी गांव गोधना, थाना पुरकाजी जिला मुज्जफरनगर हाल सलेमपुर महदूद, थाना हरिद्वार को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है। अंकित निवासी सोसायटी रोड, केशवनगर, लक्सर की तलाश की जा रही है। चारों का आपराधिक इतिहास भी खंगाला जा रहा है। इस दौरान एसपी देहात शेखर चंद्र सुयाल, एएसपी कुश मिश्रा, सीओ नरेंद्र पंत, कोतवाली प्रभारी अमरजीत सिंह, एसएसआई आनंद मेहरा आदि मौजूद रहे।

मोडिफाई करने के बाद बेचते थे बाइक, अनपढ़ हैं चारों



एसएसपी ने बताया कि चारों बाइक चोरी करने के बाद उसे मोडिफाई करते थे ताकि किसी को शक न हो सके की कि बाइक चोरी की है। इसके बाद जैसे दाम मिलते थे वैसे में ही बेच देते थे। इसके अलावा चारों अनपढ़ हैं और फरार आरोपी अंकित बाइक के पुर्जे भी अलग कर बेच देता था।
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