मंगलौर के मुंडेट गांव में हुए बवाल और आगजनी की घटना को यदि पुलिस अधिकारी शुरू में ही गंभीरता से ले लेते तो, शायद फ्लैक्सी जलाने को लेकर शुरू हुआ यह विवाद इतना गंभीर न होता। मामला एक समाज और उसकी भावनाओं से जुड़ा होने की वजह से असामाजिक तत्वों ने आग में घी जैसा काम किया।
मुंडेट गांव में शुक्रवार को हुए बवाल को यदि पुलिस अधिकारी शुरू में ही गंभीरता से लेते तो, शायद यह विवाद इतना गंभीर रुप न लेता। गांव के मुख्यद्वार पर लगी फलैक्सी को आग लगाए जाने की जानकारी सुबह करीब साढ़े छह बजे पूरे गांव को पता चल चुकी थी। ग्रामीणों ने वहां एकत्रित होना भी शुरू कर दिया था। लेकिन पुलिस इसे भांप नहीं पाई। यदि उसी समय पुलिस अधिकारी मामले को भांप लेते और मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाते तो शायद विवाद वहीं का वहीं निपट जाता। लेकिन पुलिस अधिकारियों का उस समय न पहुंचने की वजह से धीरे-धीरे भीड़ बढ़ती गई। यहां तक की आसपास के लोग भी वहां जुटने शुरू हो गए। असामाजिक तत्वों को इस दौरान भीड़ को भड़काने का मौका मिल गया। जाम की सूचना पर सीओ परीक्षित कुमार और कोतवाली प्रभारी निरीक्षक जवाहर लाल मौके पर पहुंचे लेकिन तब तक भीड़ का पारा हाई हो चुका था, रही सही कसर उस समय पूरी हो गई जब आत्मदाह का प्रयास कर रहे युवक को पुलिस अपने साथ ले जाने लगी भीड़ में शामिल कुछ उत्पाती लोगों ने इसे पुलिस का गलत कदम बताते हुए विरोध शुरू कर दिया। जिस पर पुलिस की सख्ती भारी पड़ी उत्पातियों ने पुलिस पर ही हमला बोल दिया। जिसके बाद बवाल शुरू हो गया।
पुलिस के डर से घर छोड़कर पुरुष हो गए फरार
सीओ मंगलौर परीक्षित कुमार और कई अन्य पुलिसकर्मियों के घायल होने एवं पुलिस की दो बाइकों के जला दिये जाने की घटना के बाद मुंडेट गांव के लोगों को पुलिस का डर सता रहा है। मामले में पुलिस की ओर दर्जनों ग्रामीणों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। पुलिस के साथ मारपीट कर घायल करने एवं पुलिस वाहन जला दिये जाने के मामले में पुलिस गांव में तैयारी के साथ दबिश दे सकती है। पुलिस की दबिश के डर से दलित समाज के तमाम पुरुष अपने घरों से फरार हो गए हैं। आशंका है कि शुक्रवार रात को पुलिस गांव में दबिश दे सकती है।
घायल होने के बाद भी डटे रहे सीओ
आत्मदाह का प्रयास कर रहे युवक को जैसे ही पुलिस ने बचाया और पुलिस उसे अपने साथ ले जाने लगी तो भीड़ ने धक्का मुक्की शुरू कर दी। पुलिस ने इसका विरोध किया तो भीड़ में शामिल उत्पातियों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। इस पर पुलिसकर्मी घबरा गए और बचकर भागने लगे लेकिन सीओ परिक्षित कुमार और उनके साथ एक पुलिसकर्मी वहीं डटे रहे।
कब क्या हुआ
सुबह 6.30 बजे- फ्लैक्सी जलाने की जानकारी मिलने पर ग्रामीण एकत्र होने लगे।
सुबह 7.30 बजे- ग्रामीण एकत्रित होकर फ्लैक्सी जलाने वालों की गिरफ्तारी की मांग करने लगे।
सबह 8.30 बजे- सैकड़ों लोगों ने मंगलौर-देवबंद मार्ग पर जाम लगा दिया।
सुबह 8.45 बजे- सीओ परीक्षित कुमार व इंस्पेक्टर जवाहर लाल मौके पर पहुंचे। लोगों को समझाने का प्रयास किया।
सुबह नौ बजे- ग्रामीण रजनीश ने खुद पर कैरोसिन छिड़क लिया। पुलिस ने उसे पकड़ा तो लोगो ने पथराव व आगजनी शुरू कर दी।
सुबह 9.30 बजे-जिले के कई थानों की पुलिस और पीएसी मौके पर पहुंची। भीड़ पर लाठियां भांजकर तितर बितर किया।
सुबह 11 बजे- जिलाधिकारी एवं एसएसपी मौके पर पहुचें।
सुबह 11.45 बजे- एसएसपी और डीएम ने दल बल के साथ गांव में फ्लैग मार्च किया।
विधायक कर्णवाल को सुनाई खरीखोटी
गुस्साई भीड़ ने भाजपा विधायक को जमकर खरी खोटी सुनाई। भीड़ ने विधायक की एक नही सुनीं। विधयाक ने लोगों को सड़क पर हटने के लिए राजी करने का भरसक प्रयास किया, लेकिन लोग उनकी सुनने को तैयार नही हुए। पथराव के दौरान विधायक के गनर को भी चोटें आई। ब्लॉक प्रमुख जितेद्र उर्फ गगन ने भी प्रयास किया लेकिन लोग सड़क छोडने को तैयार नहीं हुए।
पहले भी हो चुका इसी तरह का बवाल
असामाजिक तत्वों द्वारा क्षेत्र की फिजा खराब करने का एक बार फिर प्रयास किया गया है। कुछ साल पहले कुमराड़ी में अंबेडकर जयंती पर बवाल हुआ करते थे। इस बार के बवाल के पीछे विधान सभा चुनाव की रंजिश को जिम्मेदार बताया जा रहा है।
आमतौर पर मंगलौर कोतवाली क्षेत्र में लोगों के बीच आपसी भाईचारा है। शुक्रवार को अंबेडकर जयंती के बवाल ने इस भाईचारे को आग लगाने का प्रयास किया है। मुंडेट गांव झबरेडा विधान सभा के अन्तर्गत आता है। इस गांव में त्यागी व दलित लोगों की बहुतायत है। बताया जाता हैं कि गांव के त्यागियों ने भाजपा का समर्थन किया था जबकि दलित बसपा के पाले में थे। इसी कारण कुछ लोगों के मन में एक दूसरे के प्रति खटास है। जिसका परिणाम शुक्रवार को हुए बवाल के रुप में सामने आया। एसएसपी कृष्ण कुमार वी के ने कहा हैं कि बवाल के हर पहलू की जांच की जायेगी। अगर जांच में लोगों को भड़काने की बात सामने आई तो भड़काने वालों को बख्शा नहीं जायेगा। गौरतलब हैं कि कुछ साल पहले तक कुमराडी में अंबेडकर जयंती पर बवाल हुआ करते थे लेकिन अब वहा शांति का माहौल हैं।
सड़कों और खेतों में पड़ी मिली साइकिलें
बवाल कर रहे लोगों को खदेडने के लिए जब पुलिस ने लाठीचार्ज किया तो लोग वहां से भाग खड़े हुए। पुलिस को दो बाइकें मौके से मिली है। जबकि आधा दर्जन साइकिलें खेतों और सड़कों पर पड़ी मिली है। पुलिस इन सबको कोतवाली ले आई है।