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ईजी की मैराथन में दौड़े सैकड़ों

Sat, 21 Jan 2017 10:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो रुड़की
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बीईजी एंड सेंटर की अेार से शनिवार को शहर में मैराथन का आयोजन किया गया। इसमें 870 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। अलग-अलग वर्गों में आयोजित प्रतियोगिता में कमल, रमेश, पूजा और निशांत ने बाजी मारी।
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आठ किलोमीटर की मैराथन में सेना के जवान कमल सिंह ने बाजी मारी, जबकि दूसरे स्थान पर मास्टर अवधेश कुमार रहे। विजेता को आठ हजार रुपये और उपविजेता को पांच हजार रुपये के पुरस्कार दिए गए। वहीं छह किलोमीटर दौड़ में रमेश चंद त्यागी विजयी रहे, जिन्हें तीन हजार रुपये का पुरस्कार दिया गया। पांच किलोमीटर दौड़ में पूजा चौहान, मास्टर निशांत शर्मा और पूजा राघव विजेता रहे, जबकि शालू, मास्टर अंकुश तोमर और पूजा नेगी उपविजेता रहे। इससे पहले बिग्रेडियर एसके कटारिया ने ग्रुप पवेलियन मैदान से मैराथन का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए मैराथन का आयोजन किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता थलसेना से सेवानिवृत्त सदस्यों और खिलाडिय़ों को समर्पित है। प्रतियोगिता में आर्मी के जवानों और परिजनों के अलावा अन्य शहरवासियों ने भी हिस्सा लिया।

स्कूली समय में मैराथन से छात्र-छात्राओं को दिक्कत
शहर के बीचोबीच मुख्य मार्ग से अचानक आर्मी की ओर से मैराथन दौड़ के कारण शहरवासी परेशान रहे। खासतौर से सुबह स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। मैराथन के दौरान आर्मी के जवानों ने जगह-जगह यातायात को रोके रखा, जिससे शहर के चौक चौराहे पर जाम की स्थिति बनी रही।
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शनिवार की सुबह पवेलियन ग्राउंड से शुरू हुई मैराथन दौड़ वोट क्लब, नगर निगम होते हुए मुख्य मार्गों से आयोजित की गई। सैकड़ों की संख्या में मुख्य मार्ग पर प्रतिभागियों का ही कब्जा रहा। इस दौरान निगम के दोनों पुलों और अन्य चौक चौराहों पर यातायात की कमान स्वयं सेना के जवानों ने संभाल रखी थी। ऐसे में सुबह आठ बजे के करीब स्कूल जाने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई अभिभावकों ने इस पर आपत्ति भी जताई। उनका कहना था कि आर्मी की ओर से मैराथन का आयोजन करने के लिए पहले सूचना जारी करनी चाहिए थी। अचानक हुए कार्यक्रम से कई बच्चे स्कूल को भी लेट हो गए, जिससे उन्हें शिक्षकों की खरीखोटी सुननी पड़ी। इस संबंध में सिविल लाइंस कोतवाली प्रभारी ऐश्वर्यपाल का कहना है कि एक दिन पूर्व आर्मी की ओर से जानकारी दी गई थी, लेकिन स्कूल का समय होने के कारण बच्चों को परेशानी हुई।
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