रहमतपुर के पूर्व प्रधान के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के आधार पर धोखाधड़ी कर भूमि का पट्टा अपने नाम कराने के मामले में पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। साथ ही मामले की जांच शुरू कर दी है।
कलियर थाना क्षेत्र के गांव रहमतपुर निवासी मांगेराम ने कोर्ट में दिए प्रार्थनापत्र में बताया कि पदम सिंह उर्फ पदम कुमार निवासी ग्राम रहमतपुर ने सरकारी पट्टा लेने के लिए 11 जनवरी 1991 में झूठे दस्तावेज जमा किए थे। इसमें पदम सिंह ने खुद को अनपढ़ एवं बालिग दर्शाया था। जिस समय उसने दस्तावेज जमा किए थे उसकी उम्र 16 वर्ष थी।
इसके बाद उसके नाम असंक्रमणीय पट्टा जारी कर दिया गया था। बाद में पदम सिंह ने 2007 में न्यायालय चकबंदी अधिकारी रुड़की के यहां उक्त पट्टे को संक्रमणीय भूमिधरी कराने के लिए एक प्रार्थनापत्र दाखिल किया था। चकबंदी अधिकारी ने उसे संक्रमणीय भूमिधरी (पूरी तरह मालिक बनना) घोषित कर दिया था। तभी से पदम सिंह सरकारी भूमि का दुरुपयोग कर रहा है। इसकी जानकारी मिलने पर मांगेराम की ओर से न्यायालय चकबंदी अधिकारी के यहां आपत्ति दाखिल की गई थी।
इसपर न्यायालय ने 23 अगस्त 2021 को पट्टा निरस्त कर दिया था। इसके बाद मांगेराम ने पुलिस को तहरीर दी थी। आरोप है कि पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया था। इस पर उन्होंने कोर्ट की शरण ली थी। अब कोर्ट ने पुलिस को केस दर्ज करने का आदेश दिया है। एसओ जहांगीर अली ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर पदम सिंह उर्फ पदम कुमार निवासी रहमतपुर के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, मांगेराम ने बताया कि पिछली योजना में पदम सिंह गांव का प्रधान भी था।