रुड़की विधानसभा सीट पर टिकट की चौसर पर कांग्रेस में लंबे से समय से चली आ रही खींचतान और गुटबाजी के बीच आखिरकार पूर्व मेयर यशपाल राणा ने बाजी मार ली है। टिकट को लेकर लंबे समय से कांग्रेस में पूर्व मेयर यशपाल राणा, पूर्व राज्यमंत्री और युवा नेता सचिन गुप्ता के बीच सियासी चौसर पर शह और मात के लिए पासे फेंके जा रहे थे। ऐसे में माना जा रहा है कि रुड़की सीट पर राजनीतिक मुकाबला रोमांचक होगा। भाजपा विधायक प्रदीप बत्रा व पूर्व मेयर के बीच हमेशा से रहा छत्तीस का आंकड़ा और कड़ा होगा।
रुड़की सीट पर भाजपा ने प्रदीप बत्रा के नाम की पहले ही घोषणा कर दी थी लेकिन सबसे अधिक असमंजस की स्थिति कांग्रेस में बनी हुई थी। कांग्रेस में टिकट के दावेदारों की रेस में मुख्य रूप से पूर्व मेयर यशपाल राणा, पूर्व राज्यमंत्री मनोहर लाल शर्मा और युवा नेता सचिन गुप्ता शामिल थे। तीनों के नामों से एक के नाम पर मुहर लगाने के लिए लंबे समय से खींचजान और गुटबाजी साफ नजर आ रही थी। तीनों ही दून से लेकर दिल्ली तक डेरा डाले हुए थे। रुड़की की जनता को भी कांग्रेस से टिकट के दावेदार के नाम की घोषण का बेसब्री से इंतजार था। आखिरकार यह इंतजार बृहस्पतिवार को खत्म हो गया। कांग्रेस ने रुड़की से पूर्व मेयर यशपाल राणा के नाम पर मुहर लगा दी।
सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष प्रीतम सिंह पूर्व मेयर की मजबूती से पैरवी कर रहे थे। उन्होंने ही मेयर के चुनाव में भी पूर्व मेयर यशपाल राणा के टिकट पर पेंच फंसने पर पहले उनकी पत्नी और उस पर आपत्ति को देखते हुए उनके भाई को मेयर का टिकट दिलवाया था लेकिन उन्हें जीत हासिल नहीं हो पाई थी। दूसरी तरफ सचिन गुप्ता और पूर्व राज्यमंत्री मनोहर लाल शर्मा में से किसी एक को टिकट देने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पैरवी कर रहे थे। वहीं, रुड़की के चुनावी संग्राम में पूर्व मेयर के नाम की घोषणा होते ही चुनावी मुकाबला कड़ा हो गया है। वजह, पूर्व मेयर यशपाल राणा और विधायक प्रदीप बत्रा के बीच पहले से ही छत्तीस का आंकड़ा है। अब दोनों आमने-सामने हैं तो दोनों के लिए प्रतिष्ठा का भी सवाल बन गया है।