रुड़की। आखिरकार छह साल के लंबे इंतजार के बाद पाड़ली गुर्जर गांव को नगर पंचायत का दर्जा मिल गया है। हालांकि, इस गांव को वर्ष 2015 के शासनादेश के अनुसार, नगर निगम क्षेत्र में शामिल करने का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इसी के चलते शासन की ओर से जारी आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि यह अंतिम अधिसूचना सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुज्ञा याचिका के निर्णय के अधीन होगी। वहीं, प्रदेश सरकार की ओर से घोषित तीन अन्य नगर पंचायतों के लिए अधिसूचना जारी नहीं होने से बेचैनी बढ़ गई है। शासन के अधिकारियों का कहना है कि उनकी अधिसूचना की प्रक्रिया भी चल रही है। जल्द ही इस बाबत भी निर्णय आएगा।
शासन की ओर से जिस पाड़ली गुर्जर गांव में पनियाला चंदापुर को शामिल करते हुए नगर पंचायत का दर्जा गया है, दरअसल इस गांव को वर्ष 2015 में तत्कालीन हरीश रावत की सरकार ने नगर निगम में शामिल करने का शासनादेश जारी किया था। इसके बाद जब भाजपा सरकार आई तो इसे पाड़ली सहित रामपुर गांव को नगर निगम से फिर बाहर कर दिया था। मामला हाईकोर्ट में गया तो रामपुर और पाड़ली गुर्जर तो नगर निगम के अंग माने गए, लेकिन आसफ नगर और मोहम्मदपुर को अलग कर दिया गया। इसके बाद पिरान कलियर के विधायक फुरकान अहमद के पक्ष के लोगों ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की।
इसके चलते नगर निगम के चुनाव अटक गए। विधायक फुरकान अहमद के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को निगम के चुनाव तत्काल कराने के आदेश दिए, लेकिन रामपुर और पाड़ली गुर्जर को बाहर करने का कोई आदेश नहीं दिया। बावजूद इसके सरकार ने रामपुर और पाड़ली गुर्जर को शामिल किए बगैर नगर निगम के चुनाव संपन्न करा दिए। करीब चार माह पहले प्रदेश सरकार ने पाड़ली गुर्जर, ढंढेरा, इमलीखेड़ा और रामपुर को नगर पंचायत बनाने की घोषणा कर दी। शासन की ओर से 19 मई को जारी शासनादेश के तहत पाड़ली गुर्जर को नगर पंचायत का दर्जा दे दिया गया, लेकिन अन्य तीन को दर्जा नहीं मिलने से बेचैनी बढ़ गई है। संवाद
--
बदल सकते हैं सारे समीकरण
कलियर विधायक फुरकान अहमद समेत पाड़ली गुर्जर की राजनीति से जुड़े कई लोग अलग नगर पंचायत के बजाय नगर निगम में शामिल होने के पक्षधर रहे हैं। इनका आरोप है कि सरकार ने मनमानी करते हुए बिना किसी आधार के नगर पंचायत की घोषणा की है। विधायक फुरकान अहमद का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में सरकार की मनमानी से जुड़े सभी तथ्य पेश किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय सर्वोपरि होगा, लेकिन इस इस बात की संभावना ज्यादा है कि सुप्रीम कोर्ट बिना पाड़ली गुर्जर और रामपुर को शामिल किए हुए नगर निगम का चुनाव कराने पर प्रदेश सरकार के खिलाफ निर्णय देगी। ऐसा होता है तो न केवल निगम के चुनाव पर आंच आएगी बल्कि एक बार फिर से निगम क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति बदलेगी।
--
सुप्रीम कोर्ट की तारीख से पहले अधिसूचना पर चर्चा
घोषित तीन नगर पंचायतों में से पहले सिर्फ एक नगर पंचायत की घोषणा को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जानकारों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में अगले माह होने वाली सुनवाई के मद्देनजर सरकार ने यह निर्णय लिया है। इस बाबत विधायक फुरकान अहमद का कहना है कि नई पंचायतों के गठन को लेकर सरकार के पास कोई दृष्टिकोण नहीं है। केवल अपनी नाक ऊंची रखने के लिए उल्टे-सीधे फैसले लिए जा रहे हैं।
--
पाड़ली गुर्जर में पनियाला चंदापुर को शामिल करते हुए नगर पंचायत की अंतिम अधिसूचना जारी कर दी गई है। अन्य तीन नई नगर पंचायतों की अधिसूचना की प्रक्रिया जारी है।
-विनोद कुमार सुमन, सचिव (प्रभारी) शहरी विकास विभाग