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खेल स्टेडियम में दे दी मेले की अनुमति

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रुड़की नेहरु स्टेडियम में मेले के लिए की जा रही तैयारियां। - फोटो : ROORKEE
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शहर के एकमात्र खेल स्टेडियम में किसी प्रकार की व्यवसायिक गतिविधि नहीं होगी। इसका प्रस्ताव नगर निगम की बोर्ड बैठक में पास होने के बावजूद 21 दिन के लिए मेले की अनुमति जारी हो गई। मेले की तैयारियां शुरू होने पर पार्षदों का विरोध सामने आने लगा। अब मेले की अनुमति निरस्त करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
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पार्षद राकेश गर्ग का कहना था कि शहर के एकमात्र नेहरू स्टेडियम में किसी प्रकार की व्यवसायिक गतिविधि नहीं कराने का प्रस्ताव तीन साल पहले पास किया गया था। इसके बाद से यहां कोई मेला नहीं लगा था। स्टेडियम का उपयोग केवल धार्मिक आयोजनों के लिए किया जाता था। वहीं शनिवार को स्टेडियम में बड़े-बड़े झूले, मौत का कुआं और स्टॉल लगने शुरू हुए तो मेले की बात सामने आई। पार्षदों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि नगर निगम ने एक इवेंट कंपनी को 21 दिन के लिए अनुमति जारी की थी। इसके लिए प्रतिदिन 2100 रुपये का शुल्क लिया गया है। अब निगम प्रशासन अनुमति को निरस्त करने की तैयारी कर रहा है। इसके पीछे बाल प्रदर्शनी के नाम पर अनुमति लिए जाने को भी कारण बताया जा रहा है। पार्षद का कहना है कि इवेंट कंपनी को नियमों के विपरीत जाकर अनुमति दी गई है। इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। वहीं कई अन्य पार्षदों का कहना था कि स्टेडियम बच्चों के खेलने की जगह है। व्यवसायिक गतिविधियों से स्टेडियम को नुकसान पहुंचता है और खिलाड़ियों को परेशानी भी होती है। मेयर गौरव गोयल का कहना है कि यह प्रकरण संज्ञान में आने के बाद नगर आयुक्त को अवगत कराया गया है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि पूर्व में निगम की ओर से पारित हुए प्रस्ताव की जानकारी लेने के बाद नियमानुसार कार्रवाई करें।
सीएम की घोषणा के बावजूद नहीं हुआ कायाकल्प
शहर के खिलाड़ियों के लिए नेहरू स्टेडियम ही एक मात्र खेलने का स्थान है लेकिन इसमें भी उच्च स्तरीय सुविधाएं नहीं है। करीब ढाई साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री ने इसके कायाकल्प की घोषणा की थी। इसके बावजूद निर्माण कार्य के लिए डीपीआर तक तैयार नहीं हो पाई है। वर्तमान में नेहरू स्टेडियम की स्थिति यह है कि यहां मैदान भी समतल नहीं है। बारिश के दिनों में इसमें पानी भर जाता है। पानी की निकासी के भी इंतजाम नहीं हैं। रात के लिए समुचित प्रकाश की भी व्यवस्था नहीं है। इस बारे में नगर विधायक प्रदीप बत्रा कहना है कि शासन स्तर पर फाइल लंबित है। जल्द ही इसके लिए मुख्यमंत्री से वार्ता कर काम शुरू कराया जाएगा।
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प्राइवेट स्कूल कमोबेश हैं आगे
शहर के राजकीय इंटर कॉलेज, बीएसएम इंटर कॉलेज समेत अन्य सरकारी और सहायता प्राप्त कॉलेजों में खेल के मैदान तो हैं लेकिन खेल के मानकों के अनुरूप नहीं है। प्राइवेट स्कूूल कमोबेश इसमें आगे हैं। कई प्राइवेट स्कूलों में क्रिकेट, बालीवॉल और बैडमिंटन कोर्ट बनाए गए हैं। स्कूलों से निकलकर अपने स्तर पर प्रेक्टिस करने वाले युवाओं के लिए बेहतर खेल के मैदान का अभाव बना हुआ है।
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