आईआईटी के नए निदेशक प्रो. एके चतुर्वेदी ने कहा कि उनका पहला प्रयास संस्थान की विश्वस्तरीय रैंकिंग को और और ऊंचा ले जाना है। इसके लिए जो भी जरूरी कदम होंगे, वे सब उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि एडमिशन प्रक्रिया, फैकल्टी चयन, लैब सहित सभी संसाधनों को उन्नत कर इस दिशा में प्रयास किया जाएगा। इस दौरान उन्होंने भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं को ध्यान में रखकर शोध प्रोजेक्ट पर काम किए जाने की जरूरत बताई।
संस्थान निदेशक प्रो. चतुर्वेदी ने मंगलवार को प्रेस के समक्ष राय साझा करते हुए कहा कि आईआईटी में देश के विकास में योगदान के लिए अपार क्षमताएं हैं। जिसका उपयोग समाज के लिए उपयोगी तकनीक बनाकर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि संस्थान की रैंकिंग में सुधार के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जाएंगे। साथ ही भारत सरकार के महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट स्वच्छ भारत अभियान, मेक इन इंडिया, स्टार्ट अप, कौशल विकास जैसे कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए योगदान दिया जाएगा। इसके लिए जितनी भी ग्रांट की आवश्यकता होगी उसके लिए प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने फैकल्टी चयन प्रक्रिया पर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि चयन प्रक्रिया प्रतिभा के आधार पर नियमानुसार होगी। संस्थान में कम सीजीपीए के चलते छात्रों के निष्कासन के बाद उन्हें वापस लिए जाने के सवाल उन्होंने कहा कि इस संबंध में भी जो भी नियम निर्धारित किए गए हैं। उन्हीं के हिसाब से फैसले लिए जाएंगे। इस दौरान उन्होंने उद्यमिता के जरिए तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया।
नए निदेशक के सामने यें होंगी चुनौती
संस्थान में नियुक्ति को विश्वस्तरीय फैकल्टी को आकर्षित करना।
फैकल्टी, कर्मचारी और प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना।
छात्रों को स्टार्ट अप के तहत खुद की कंपनियां स्थापित करने को प्रेरित करना।
अंग्रेजी के कारण अच्छा स्कोर हासिल नहीं करने वाले छात्रों की समस्या का समाधान करना।
रेलवे रिसर्च सेंटर पर शोध परियोजनाओं को शुरू कराना।
विश्वस्तरीय रैंकिंग के मुकाबले में संस्थान को खड़ा करना।
- विश्व स्तरीय शोध परियोजनाएं संचालित करना एवं बेहतर परिणाम हासिल करना।
- जन उपयोगी शोध परियोजनाओं को शुरू कराना एवं आमजन तक पहुंचाना।
- देश में आपदा न्यूनीकरण एवं ढांचागत विकास में योगदान देना।