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Roorkee News: कोल्हुओं पर गन्ने के भाव बढ़ने से शुगर मिल में आवक घटी

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क्षेत्र के गन्ना कोल्हुओं में दाम बढ़ने से उत्तम शुगर मिल को गन्ना मिलना कम हो गया है। इसके कारण मिल प्रबंधन तंत्र की चिंता बढ़ने लगी है। यही स्थिति रही तो उत्तम शुगर मिल कभी भी बंद हो सकती है।
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लिब्बरहेड़ी स्थित उत्तम शुगर मिल के क्षेत्र में लगे गन्ना कोल्हुओं में गन्ने का भाव 450 रुपये से 500 तक हो गया है। इस कारण उत्तम शुगर मिल को गन्ना कम मात्रा में मिलने लगा है। शुगर मिल की क्षमता 80 हजार क्विंटल गन्ना पेराई की है। मिल को 40 से 45 हजार क्विंटल ही गन्ना मिल पा रहा है।



इसके कारण मिल प्रबंधन की चिंताएं बढ़ने लगी हैं। शुगर मिल का प्रिंस सत्र शुरू हुए लगभग डेढ़ महीना हुआ है और अब तक अधिकतम पेराई अब तक 50 से 60 हजार क्विंटल तक गन्ने की आवक ही पहुंच रही थी। अब गन्ने की आवक 40 हजार क्विंटल तक ही हो रही है। इसके कारण मिल प्रबंधन तंत्र को गांव-गांव जाकर किसानों से मिल को गन्ना देने की अपील करनी पड़ रही है।
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कई वर्षों के बाद मिल के सामने ऐसी स्थिति आई है। बीते वर्षों में जहां किसान मिल से गन्ना पर्चियों की डिमांड करते थे। इस बार शुगर मिल को पेराई क्षमता पूरी करने के लिए गांव-गांव जाकर किसानों से गन्ने की डिमांड करनी पड़ रही है। शुगर मिल गन्ना मूल्य का भुगतान भी समय पर कर रहा है उसके बावजूद भी शुगर मिल को उसकी क्षमता के अनुरूप गन्ना नहीं मिल पा रहा है। गन्ना केंद्रों से भी आपूर्ति कम है। मिल को गन्ना की आपूर्ति नहीं बढ़ी तो ऐसी स्थिति में उत्तम शुगर मिल कभी भी बंद हो सकती है।



कोल्हुओं पर गन्ना मूल्य 450 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तक हो जाने से मिल को गन्ना नहीं मिलने का मुख्य कारण है। वहीं क्षेत्र में 30 प्रतिशत गन्ने की बुआई कम होने के साथ-साथ जुलाई-अगस्त के महीने में हुई जबरदस्त बारिश के कारण गन्ने की फसल का खराब हो जाना भी माना जा रहा है। - अनिल सिंह, गन्ना महाप्रबंधक
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उत्तम शुगर मिल लिब्बरहेड़ी मंगलौर
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