रुड़की। संकल्प-2006 के अंतर्गत रविवार को सीनेट हाल में आयोजित यूथ पार्लियामेंट में युवाओं ने देश में खाद्य पदार्थों की बर्बादी को रोकने और प्रत्येक व्यक्ति को भोजन उपलब्ध कराने को लेकर योजनाओं पर विचार विमर्श किया।
निर्णायक की भूमिका में प्रो. दीपक कश्यप ने कहा कि अपने भोजन पर हमारा अधिकार है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम उसे वेस्ट करें। प्रो. एसपी सिंह ने खाद्य सुरक्षा के लिए नवीन तकनीकी के इस्तेमाल पर जोर दिया। उन्होंने उदाहरण दिया कि पहले जब फ्रिज की सुविधा नहीं थी तो पका हुआ भोजन कुछ समय बाद खराब हो जाता है। अब इसे काफी समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है। यूथ पार्लियामेंट में छात्रों ने गरीबों को भोजन की उपलब्धता के लिए चैरिटेबल संस्थाओं को दान किए जाने को लेकर विचार रखे। इसके अलावा छात्रों ने खाद्य पदार्थों पर टैक्स में छूट, खाद्य वितरण प्रणाली, खाद्य पदार्थों का खराब होना, खाद्य पदार्थों का रिसाइकलिंग कर पुन: उपयोग करने जैसे मुद्दों पर विचार विमर्श किया। इस दौरान फैकल्टी एडवाइजर डा. स्मिता झा समेत छात्र-छात्राएं मौजूद रहीं। दूसरी ओर भारतीय खादी ग्रामोत्थान संस्थान ऋषिकेश की ओर से हाथ के बने थैले, शॉल, जैकेट एवं पर्स आदि का स्टॉल लगाया। संस्थान से जुड़ी बसंती रावत एवं बीना पुंडीर ने बताया कि आईआईटी में उनके उत्पादों की खूब मांग है।
‘आईक्यू’ से ज्यादा ‘एसक्यू’ वाले होते हैं बुद्धिमान
रुड़की। आईक्यू यानी बुद्धिमत्ता परीक्षण ही किसी व्यक्ति के बुद्धिमान होने का सबसे बड़ा पैमाना नहीं है। बल्कि आईक्यू के बाद ईक्यू यानी इमोशनल परीक्षण और एसक्यू यानी अध्यात्मिक परीक्षण सही मायने में किसी व्यक्ति की बुद्धिमत्ता का परिचय देता है। यह कहना है संकल्प कार्यक्रम में आए अक्षय पात्र फाउंडेशन के वॉलिंटियर भास्कर एवं अभिलाष गुप्ता का। फाउंडेशन की ओर से आईआईटी में आयोजित कार्यशाला में छात्रों को बताया गया कि यह जरूरी नहीं है कि जिन व्यक्ति का आईक्यू अधिक हो वे जीवन के महत्वपूर्ण समय में उचित निर्णय लेने में कामयाब होते हैं। बल्कि इसके लिए व्यक्ति का भावनात्मक स्तर और आध्यात्मिक स्तर भी जानना जरूरी होता है। उन्होंने बताया कि जो लोग आध्यात्मिक स्तर पर मजबूत होते हैं। वे लोग जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ते हैं। इस दौरान उन्होंने बताया कि संस्था 16 लाख बच्चों को निशुल्क मिड डे मील भोजन उपलब्ध करा रही है। जिसके लिए संस्था के मधु पंडित दास को पद्मश्री अवार्ड भी मिल चुका है। उन्होंने छात्रों को पुस्तकों के जरिए आध्यात्मिक जीवन अपनाने के लिए प्रेरित किया।