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दिव्यांगों ने बाइक रेस जीत किया खुद को साबित

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दिल्ली में आयोजित बाइक रैली में ट्राफी जीतकर लौटे लक्सर व खानपुर के दिव्यांग। - फोटो : ROORKEE
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‘मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है।’ इन पंक्तियों को लक्सर के दो दिव्यांग खिलाड़ियाें ने सार्थक कर दिया है। इन खिलाड़ियों ने दिल्ली से अलवर तक लगभग 350 किलोमीटर की बाइक रेस में प्रथम स्थान प्राप्त कर क्षेत्र के साथ ही उत्तराखंड का नाम रोशन किया है। उनके प्रथम आने पर दिव्यांगों की संस्था गैप (ग्रुप फॉर स्ेपशन पीपुल्स) ने उन्हें ट्रॉफी और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया।
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खानपुर विकासखंड के कारवाला गांव निवासी प्रदीप कुमार का एक पैर लगभग 85 फीसदी तक खराब है। इनके अलावा दाबकी गांव निवासी दिग्विजय को भी काफी पहले पोलियो हो गया था। पोलियो में उनके दोनों पैर चलने लायक नहीं रहे थे। तमाम मुश्किलों के बावजूद इन दोनों दिव्यांगों ने हिम्मत नहीं हारी और अपने हौसले को हमेशा कायम रखा। समय समय पर दोनों दिव्यांग ब्लॉक और जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेते रहे। कुछ दिन पहले ही दिव्यांगों की दिल्ली की एक संस्था गैप ने पांचवीं फ्रीडम ऐसेसिंबल अवेयरनेस बाइक रेस आयोजित की थी। इस बाइक रेस में प्रदीप कुमार और दिग्विजय ने भी भाग लिया था। यह रेस दिल्ली के राजपथ से शुरू होकर अलवर तक जाने वाले लगभग 350 किलोमीटर की यात्रा करने के बाद वापस इंडिया गेट आनी थी। इस रेस में प्रदीप कुमार व दिग्विजय ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। उनके प्रथम स्थान प्राप्त करने पर गैप के पदाधिकारियों ने दोनों दिव्यांगों को ट्राफी व प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया है। बृहस्पतिवार को दोनों खिलाड़ी बाइक रैली जीतकर घर वापस लौटे हैं। वापस लौटे प्रदीप और दिग्विजय ने बताया कि जीवन में सघर्ष करने वालों की कभी हार नहीं होती है। व्यक्ति को कभी विपरीत परिस्थितियों के आगे घुटने नहीं टेकने चाहिए। बल्कि उनका निडरता से सामना करना चाहिए।
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