रुड़की। तीन महीने पहले खनन माफियाओं की ओर से गंगनहर से निकाले गए रेत को तहसील प्रशासन ने नीलाम करने के लिए अपने कब्जे में लिया था, लेकिन लापरवाही का आलम यह है कि अभी तक इस संबंध में कुछ नहीं किया गया। प्रशासन की इस अनदेखी का फायदा उठाकर माफिया खुलेआम रेत उठाकर ले जा रहे हैं।
पिछले वर्ष दशहरे के आसपास उत्तरी खंड गंगनहर को साफ-सफाई एवं मरम्मतीकरण के लिए बंद किया गया था। इस दौरान आसफनगर झाल से सैदपुरा, मंगलौर, लिब्बरहेड़ी, सकौती, मोहम्मदपुर, मोहम्मदपुर जट, मंडावली उत्तराखंड की सीमा नारसन तक गंगनहर घाटों पर खनन माफियाओं ने करोड़ों रुपये का अवैध खनन किया था। पुलिस-प्रशासन की ओर से कोई रोक टोक नहीं लगाने पर पहले तो माफिया ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से दिनरात रेत बेचते रहे। लेकिन जैसे-जैसे नहर में पानी छोड़ने के दिन नजदीक आते गए माफियाओं ने गंगनहर के दोनों किनारों पर इसके ढेर लगाने शुरू कर दिए।
बाद में इन ढेरों को तहसील प्रशासन ने अपने कब्जे में लेने का दावा किया। एक दिसंबर को रेत को नीलाम करने के लिए ज्वाइंट मजिस्ट्रेट मंगेश घिल्ड़ियाल टीम के साथ मौके पर भी पहुंचे थे, लेकिन माफिया के डर से एक भी खरीदार नहीं पहुंचा। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने दोबारा रेत को नीलाम करने की बात कही थी। लेकिन तीन माह बीतने के बाद भी न रेत को नीलाम करने के लिए दोबारा से कोई तिथि तय की और न रायल्टी वसूली। प्रशासन की इस उदासीन कार्यशैली के चलते माफिया अधिकतर रेत उठा चुके हैं। शेष रेत को भी रोजाना उठवा रहे हैं। इससे सरकार को मिलने वाले राजस्व को चपत लग रही है।
इनका कहना है
रेत को नीलाम करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। जब तक रेत नीलाम न हो जाए तब तक इसकी सुरक्षा के लिए भी कदम उठाए जाएंगे।
मंगेश घिल्ड़ियाल, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, रुड़की
मामला मेरी जानकारी में नहीं है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट से बात कर रेत से राजस्व वसूली के लिए कार्रवाई शुरू की जाएगी।
अभिषेक त्रिपाठी, एडीएम, वित्त