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लक्सर में बवाल, पुलिस पर पथराव

Mon, 21 Dec 2015 12:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
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लक्सर। पंचायत चुनाव के मतदान से एक दिन पहले लक्सर में दलित महिलाओं की ओर से विवादित भूखंड पर रातोंरात स्थापित की गई अंबेडकर मूर्ति हटवाने गई पुलिस पर भीड़ ने पथराव कर दिया और वाहनों में तोड़फोड़ कर डाली। पुलिसकर्मियों को जान बचाकर भागना पड़ा। इसके बाद भारी पुलिस फोर्स लेकर पहुंचे पुलिस प्रशासन के अधिकारियों को लाठी डंडों और पत्थरों से लैस ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। कई घंटे चले बवाल में भीड़ को तितर बितर करने के लिए पुलिस ने जमकर लाठी चार्ज किया और कई राउंड हवाई फायरिंग की। जिसमें दारोगा समेत चार पुलिसकर्मी और करीब 45 से अधिक महिला पुरुष घायल हो गए। इनमें से छह महिलाओं को गंभीर चोटें आई है। घरों में दबिश देकर कई महिलाओं और पुरुषों को हिरासत में लेने के बाद पुलिस ने मूर्ति को हटवा दिया।
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लक्सर गांव में मुख्य मार्ग के समीप करीब एक बीघा के विवादित भूखंड पर दलित महिलाओं ने शनिवार की रात करीब दो बजे अंबेडकर की मूर्ति स्थापित कर दी। इस भूखंड पर मालिकाना हक को लेकर नगर पंचायत और एक स्थानीय व्यक्ति के बीच का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। रविवार सुबह करीब नौ बजे सैकड़ों महिलाएं यहां पूजा-अर्चना के लिए एकत्र हो गई। जिस पर नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी एससी जोशी और लक्सर निवासी चांदमल ने कोतवाली में तहरीर देकर मूर्ति हटवाने की मांग की।
सीओ आरएस टोलिया पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाते हुए वहां से हटने के लिए कहा। लेकिन, महिलाओं और ग्रामीणों ने लाठी डंडों और पत्थरों से पुलिस पर हमला बोल दिया और वाहनों में तोड़फोड़ शुरू कर दी। पुलिसकर्मियों को बमुश्किल जान बचाकर भागना पड़ा। इसके बाद एसपी देहात प्रमेंद्र डोबाल, एसडीएम मोहम्मद नासिर, सीओ कुलदीप असवाल भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और उपद्रवियों को खदेड़ना का प्रयास किया। लेकिन, यहां फिर से ग्रामीण सामने आ गए और पथराव शुरू कर दिया। करीब एक घंटे तक चले बवाल के दौरान पुलिस ने जमकर लाठी चार्ज किया और कई राउंड हवाई फायरिंग कर उपद्रवियों को तितर बितर किया। दोपहर करीब सवा दो बजे मौके से मूर्ति हटाई गई। पुलिस ने गांव में दबिश देकर 12 से अधिक महिला पुरुषों को हिरासत में लिया है।
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कब क्या हुआ -
- शनिवार 2.00 बजे रात - ग्रामीणों ने अंबेडकर मूर्ति स्थापित की।
- रविवार 9.00 बजे सुबह - सैकड़ों महिलाएं पूजा अर्चना को एकत्र हुई।
- 10.00 बजे - नगर पंचायत प्रशासन और एक व्यक्ति ने कोतवाली में तहरीर दी।
- 11.15 बजे - सीओ पुलिस फोर्स के साथ ग्रामीणों को समझाने पहुंचे।
- 11.30 बजे - पुलिस ने महिलाओं को उठाने का प्रयास किया।
- 11.35 बजे- महिलाओं ने पुलिसकर्मियों पर लाठी डंडों और पत्थरों से हमला शुरू किया।
- 11.45 बजे- पुलिसकर्मियों ने भागकर बचाई जान, लौटे।
- 12.15 बजे- एसपी देहात भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे।
- 12.30 बजे - पुलिस ने लाठी चार्ज और फायरिंग शुरू की।
- 1.00 बजे - दर्जनों महिलाओं और पुरुषों को हिरासत में लिया।
- 2.15 बजे - पुलिस कर्मियों ने मौके से मूर्ति हटवाई।

नशा मुक्ति आंदोलन से सामाजिक क्रांति का बिगुल
लक्सर। अंबेडकर मूर्ति की स्थापना को लेकर महिलाओं का एकजुट होना भले राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा हो। बावजूद इसके कम पढ़े लिखे माहौल में महिलाओं किसी सामाजिक मुद्दे पर सशक्त विरोध प्रदर्शन कर सड़क पर उतरना सामाजिक क्रांति से कम नहीं कहा जा सकता। विरोध करने वाली इन महिलाओं में अधिक तर वही महिलाएं थी जिन्होंने करीब छह माह पूर्व डा. भीम राव अंबेडकर समाज सुधार समिति का गठन कर शराब विरोधी अभियान चलाया था।
इसे आधुनिक समाज में महिलाओं की जागरूकता का ही परिणाम कहा जा सकता है। लक्सर गांव की कुछ महिलाओं ने करीब छह माह पूर्व संगठित होकर शराब और सड़कों के किनारे खड़ी जानलेवा पनवाड़ के खिलाफ अभियान चलाया था। यही नहीं इन महिलाओं ने एक संगठन बनाकर कोतवाली पर धरना प्रदर्शन किया था और लक्सर-हरिद्वार मार्ग पर भी जाम लगा दिया था। अब इन्हीें महिलाओं ने डा. अंबेडकर की मूर्ति स्थापना का जिम्मा अपने हाथों में ले लिया। ऐसे में बेहद कम पढ़े लिखे माहौल की इन महिलाओं सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों के लिए एकजुट होना किसी क्रांति से कम नहीं कहा जा सकता है। शायद इसी का परिणाम है कि भले ही पुलिस प्रशासन के बल के सामने मूर्ति लगाने की हसरत अभी पूरी नहीं हो पाई। लेकिन इसका परिणाम इतना जरूर हुआ कि जिलाधिकारी ने उन्हें मूर्ति लगाने के लिए एक अन्यत्र जगह पर स्वीकृति दे दी। ऐसे में भले ही राजनीतिक पार्टियों को इसका कोई लाभ मिले या नहीं लेकिन इन महिलाओं को अपने प्रयास में कामयाबी जरूर मिली है।


2007 में भी मूर्ति लगाने को हुआ था ऐसा ही विवाद
लक्सर के समीप पीपली गांव में एक व्यक्ति के खेत पर 2007 में रातोंरात इसी तरह मूर्ति लगा दी गई थी। जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस की इसी अंदाज में पुलिस कर्मियों से भिड़ंत हुई थी। पुलिसकर्मियों सहित कई लोग घायल भी हुए थे। कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने खेत से मूर्ति को हटवाया था। यह मामला अभी तक कोर्ट में विचाराधीन है।


पुलिस ने 26 महिलाओं और 21 पुरुषों का कराया मेडिकल
- मूर्ति स्थापना को लेकर हुए बवाल के मामले में पुलिस ने 26 महिलाओं और 21 पुरुषों को हिरासत में लिया है। पुलिस ने इन सभी का मेडिकल कराया है। बताया गया है कि इनमें से छह महिलाओं को गंभीर चोटें आई है। वहीं बवाल के दौरान पत्थर लगने से एसआई उमेश कुमार के सिर में चोट आई है।

सत्संग करने आए, पहुंचे कोतवाली
पथरी थाना क्षेत्र के इब्राहिमपुर गांव निवासी मालती अपने पति हरिद्वारी के साथ रविवार को घटनास्थल के समीप संत निरंकारी भवन में सत्संग के लिए पहुंचे थे। बाहर निकले तो नजारा बदला हुआ था। पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में ले लिया और जबरदस्ती पकड़कर कोतवाली ले आई। कोतवाली के बाहर आंसू बहा रही मालती का कहना था कि उनका तो कोई कसूर भी नहीं है। पुलिस को पूरी बात बताई लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है।
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