रुड़की।
विश्व प्रसिद्ध दरगाह पिरान कलियर में एक बार फिर दान की रसीदों में
गोलमाल का मामला सामने आया है। दिल्ली के एक जायरीन ने दान के रूप में 5100
रुपये की एक रसीद कटाई। लेकिन, कार्बन कॉपी समेत दस्तावेजों में गड़बड़ी
कर सिर्फ 100 रुपये जमा कराए गए। दान का माल जेब में भरने का यह ताजा और
मामूली नमूना है। कितनी और रसीदों में हेराफेरी हुई है, इसकी पोल निष्पक्ष
जांच में खुल सकती है।
दरगाह साबिर पाक में लाखों जायरीनों की आस्था
जुड़ी हुई है। यह अकीदत का ही नतीजा है कि देश ही नहीं विदेशों तक से भी
जायरीन दरगाह पर खीचें चले आते हैं। उर्स के अलावा आम दिनों में भी जायरीन
दिल खोलकर दान व चढ़ावा भी चढ़ाते हैं। जायरीनों का दान दरगाह के
दानपात्रों को कम, कर्मचारियों की जेबें ज्यादा भर रहा है। इसकी बानगी एक
बार फिर सामने आई है। दिल्ली के जायरीन मुर्शिद अली चौधरी ने बीते 10
अक्तूबर को 5100 रुपये का दान दरगाह में दिया। गिनकर नोट लेने के बाद
उन्हें बुक संख्या 829 की रसीद संख्या 98 दी गई। दान देने के बाद मुर्शिद
खुशी-खुशी घर लौट गए।
उनकी रकम से सिर्फ 100 रुपये दरगाह के खाते में
जमा कराते हुए बाकी पांच हजार रुपये हजम कर लिए गए। अमर उजाला को सूत्रों
से हासिल हुई दान की रसीद समेत अलग-अलग दस्तावेजों में इसकी बाकायदा तस्दीक
होती है। गौर करने वाली बात यह है कि गोलमाल का यह वाक्या आम दिनों का है,
सालाना उर्स समेत कई ऐसे मौकों पर जब जायरीनों की संख्या लाखों में रहती
है, कितने बड़े पैमाने पर गोलमाल होता रहा है। ताजा प्रकरण में रसीद काटने
से लेकर जमा करने वाले कर्मचारियों समेत तत्कालीन प्रबंधक की भूमिका भी
सवालों के घेरे में आ रही है।
उड़ी रहीं नियमों की धज्जियां
जायरीनों
से मिलने वाले दान को दरगाह के बैंक खाते में जमा करने भी नियमों की खुलकर
धज्जियां उड़ाई जा रही है। नियमानुसार रसीद कटने के अगले दिन सुबह 11 बजे
तक पूरा कैश बैंक में जमा हो जाना चाहिए। लेकिन, कैश कई-कई दिन बाद जमा
कराया जाता है। ताजा मामले में 10 अक्तूबर को काटी गई रसीद की धनराशि
सहकारी बैंक में दरगाह के खाते में 13 अक्तूबर को जमा कराई गई। दान की रकम
नियम विरुद्ध कई दिन अपने पास रखने से भी मंशा पर सवाल खड़े होने लाजिमी
हैं।
पहले भी हुई दान की बंदरबांट
कलियर में दान की रकम की
बंदरबांट नई नहीं है। इससे पहले गोलक कांड समेत अनगिनत मामले चर्चाओं में
रहे हैं। वहीं दरगाह के भीतर से लेकर बाहर तक रोजमर्रा बिना रसीद के जुटाए
जाने वाले दान में हेराफेरी का कोई हिसाब ही नहीं है।
तनख्वाह हजारों में, मिल्कियत करोड़ों में
कलियर
दरगाह में तैनात कर्मचारियों की तनख्वाह भले ही मामूली हो, लेकिन कई
कर्मचारियों की मिल्कियत करोड़ों में हैं। बैंक खातों में जमा लाखों की रकम
से लेकर लाखों की अचल संपत्तियां भी खरीदी गई हैं। गड़बड़ी के आरोप
प्रत्यारोप उजागर होने के बावजूद राजनीतिक संरक्षण के चलते कई कर्मचारी
लगातार दरगाह में कुंडली जमाए हुए हैं।
मैंने दो दिन पहले ही चार्ज
लिया है। यह मामला संज्ञान में नहीं है। ऐसा है तो वाकई गंभीर मामला है।
इसकी पूरी जांच कराते हुए संबंधित कर्मचारी के खिलाफ निश्चित तौर पर कानूनी
कार्रवाई की जाएगी। -एम जफर खान, दरगाह मैनेजर पिरान कलियर।
रसीद
में हेराफेरी का मामला अभी तक संज्ञान में नहीं था, इस मामले की पूरी जांच
कराते हुए संबंधित के खिलाफ निश्चित तौर पर कार्रवाई की जाएगी। -मंगेश
घिल्डियाल, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/मेलाधिकारी कलियर।