रुड़की। अधिकतर सिक्योरिटी एजेंसियों की ओर से वर्दी न देने से शहर के एटीएम में तैनात सुरक्षाकर्मी सिविल ड्रेस में रहते हैं। ऐसे में बिना वर्दी ड्यूटी करने वाले गार्ड को भी आम जनता एटीएम के अंदर बैठे लुटेरा को सिक्योरिटी गार्ड समझ बैठती है। इससे भी कई बार घटनाएं हो चुकी हैं।
एटीएम में हो रही लूट की घटनाओं के लिए सुरक्षागार्ड मुहैया कराने वाली एजेंसियां भी जिम्मेदार हैं। अधिकतर एजेंसियों की ओर से अपने फायदे के लिए अपने गार्ड को एक वर्दी दी जाती है। जिसकी वजह से सप्ताह में अधिकतर दिन गार्ड बिना वर्दी के ड्यूटी करते हैं। आम लोगों के लिए यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि एटीएम के अंदर बैठा व्यक्ति सुरक्षागार्ड है या लुटेरा। कई बार एटीएम के अंदर बाहरी व्यक्ति आकर बैठ जाता है और लोग उसे सुरक्षागार्ड समझकर मदद मांगते हैं। फिर वह मदद मांगने वाले के खाते से रकम दूसरे खाते में ट्रांसफर कर देता है। जिन एटीएम में सुरक्षागार्ड नहीं है उनके बाहर आवारा लड़के घूमते रहते हैं। शिकार मिलने पर वे उसे दबोच लेते हैं।
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स्टाइलिश नंबरों पर कार्रवाई करें पुलिस
पुलिस की ओर से वाहनों की जांच के नाम पर कागज तो चेक किए जाते हैं, लेकिन वाहनों पर लिखी नंबर प्लेट को लेकर कार्रवाई नहीं की जाती। कई बार करसिव राइटिंग (स्टाइलिश में लिखे नंबर) नंबर प्लेट वाली बाइक से बदमाश वारदात को अंजाम देते हैं। फिर उस बाइक का नंबर न मौजूद लोग नोट कर पाते हैं और न भागने के दौरान कोई राहगीर उसे नोट कर पाता है। ऐसे में पुलिस को करसिव राइटिंग वाली बाइक पर कार्रवाई करनी चाहिए। सात अप्रैल को एक्सिस बैंक के एटीएम में जो लूट हुई उस बाइक का नंबर भी कोई नोट नहीं कर पाए।
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एटीएम के अंदर बैठा रहा युवक
करीब 20 दिन पूर्व सिविल लाइन स्थित इंडियन ओवरसीज बैंक के एटीएम के अंदर भी एक युवक काफी देर तक बैठा रहा। लोग उसे सुरक्षागार्ड समझते रहे। जब बैंक प्रबंधन ने उस युवक के बारे पूछा तो वह कुछ नहीं बता पाया। इस बावत तब इंडियन ओवरसीज बैंक के प्रबंधक भगवान मिश्रा से बातचीत की तो उनका कहना था कि एटीएम सुरक्षा गार्ड की तैनाती को लेकर उन्होंने मुख्यालय को लिखा है, लेकिन एटीएम की सुरक्षा के लिए गार्ड उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं।