ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
एक उच्च शिक्षण संस्थान की दो अलग-अलग छात्राओं के यौन उत्पीड़न के आरोपी दो प्रोफेसरों की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने दोनों मामलों में अगली सुनवाई तक पुलिस को गिरफ्तार न करने के आदेश दिए हैं। केस दर्ज होने के बाद दोनों प्रोफेसर गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट चले गए थे, जहां दोनों को कोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे मिल गया। वहीं, पुलिस की दोनों मामलों में जांच जारी है।
रुड़की के एक उच्च शिक्षण संस्थान की एक छात्रा ने कुछ दिन पहले डीन, निदेशक समेत छह प्रोफेसरों पर यौन उत्पीड़न व जातीय भेदभाव करने का आरोप लगाया था। इस मामले में एसएसपी ने एसआईटी टीम का गठन कर जांच करने के निर्देश दिए थे। इस दौरान छात्रा के समर्थन में भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने सिविल लाइंस कोतवाली का घेराव किया था। इस बीच एसआईटी की जांच के बाद सिविल लाइंस कोतवाली में दो प्रोफेसरों पर मुकदमा दर्ज हुआ था। छात्रा के प्रकरण में एससीएसटी आयोग दिल्ली ने संज्ञान लिया था और पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी, छात्रा व संस्थान की जांच टीम को तलब किया था। साथ ही सभी के बयान दर्ज किए थे। इस दौरान संस्थान की एक अन्य छात्रा ने पहचान गुप्त रखने की शर्त रखते हुए दो प्रोफेसरों में से एक प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न की शिकायत एसएसपी से की थी। एसएसपी ने इस मामले की जांच करवाई थी। इसके बाद एक प्रोफेसर पर दूसरा यौन उत्पीड़न का केस दर्ज किया था। इसी बीच दोनों प्रोफेसर गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट चले गए। दोनों प्रोफेसरों को हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर रोक के लिए स्टे मिल गया। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक दोनों प्रोफेसरों की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए पुलिस को गिरफ्तारी नहीं करने के आदेश दिए। सीओ चंदन सिंह बिष्ट ने बताया कि दोनों प्रोफेसर गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट से स्टे लेकर आए हैं। मामले में पुलिस की ओर से अभी जांच जारी है।
शनिवार को नहीं हो सके बयान दर्ज
संस्थान की दूसरी छात्रा के यौन उत्पीड़न के मामले में विवेचक महिला दारोगा शनिवार को छात्रा व प्रोफेसर समेत अन्य लोगों के बयान दर्ज करने संस्थान पहुंची, लेकिन शनिवार को संस्थान का अवकाश होने के कारण बयान दर्ज नहीं हो पाए। विवेचक महिला दारोगा मनसा ध्यानी ने बताया कि शनिवार व रविवार को अवकाश होने पर अब सोमवार को मामले में बयान दर्ज किए जाएंगे।