फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर प्रधान बनने के आरोप पर जांच टीम बिजनौर पहुंची तो वहां भी प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया। टीम ने महिला प्रधान के मायके एवं आसपास के गांवों में धनगर जाति से जारी होने वाले प्रमाण पत्रों की जांच की तो किसी एक का भी एससी का प्रमाण पत्र नहीं मिला। अब टीम रिपोर्ट जल्द डीएम को भेजेगी।
बहादराबाद ब्लॉक क्षेत्र के गांव औरंगाबाद में पंचायत चुनाव के दौरान धनगर जाति से एससी का प्रमाण पत्र हासिल कर हृदयेश देवी ग्राम प्रधान बनी थी। लेकिन विपक्ष ने उसके जाति प्रमाण पत्र को फर्जी बताते हुए प्रशासन से शिकायत की थी। प्रशासन ने जाति प्रमाण पत्र निरस्त भी कर दिया था, लेकिन प्रधान पक्ष की ओर से प्रशासन की इस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी। उस पर हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी को स्क्रू्टनी कमेटी गठित कर मामले के निस्तारण के आदेश भी दिए थे।
जिलाधिकारी हरबंस सिंह चुघ ने जाति प्रमाण पत्र की सत्यता जांचने के लिए एक जांच टीम गठित की थी। टीम ने बिजनौर पहुंचकर ग्राम प्रधान के प्रमाण पत्र की जांच के लिए धनगर जाति के अन्य लोगों से पूछताछ की। टीम के सदस्य टीआर मलेटा ने बताया कि पूछताछ के दौरान सामने आया कि प्रधान के गांव एवं आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले धनगर जाति के लोगों में से किसी एक का भी एससी का प्रमाण पत्र नहीं बना है। उनका कहना है कि जांच टीम, रिपोर्ट जल्द डीएम को भेजेगी।