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Roorkee News: सूडान से जहाज में बैठने के बाद आई जान में जान

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सूडान में फंसा भारतीय परिवार पानी के जहाज से सऊदी अरब के लिए हुआ रवाना



झबरेड़ा के खजूरी गांव निवासी परिजनों ने ली राहत की सांस, वापसी की कर रहे दुआएं



गृह युद्ध की चपेट में आए सूडान में फंसा भारतीय परिवार जब भारत और सऊदी अरब के संयुक्त प्रयासों से जहाज में बैठकर रवाना हुआ तो जान में जान आई। परिवार के सदस्यों ने सूडान से निकलते ही झबरेड़ा के खजूरी गांव में अपने परिजनों को जानकारी दी तो वह भी खुशी से झूम उठे।



सूडान में कुछ दिन से वहां की सेना और अर्द्धसैनिक बलों में झड़प चल रही है। वहां गृह युद्ध का माहौल बना हुआ है। सूडान में झबरेड़ा के खजूरी गांव के दो युवा फंसे हुए थे। ऐसे में वहां के हालातों को देखते हुए उनके परिवार के सदस्यों की बुरी हालत थी। ग्राम खजूरी निवासी सफदर त्यागी के अनुसार उनका बेटा जुनैद त्यागी (25) सूडान की एक वाटर टैंक बनाने की कंपनी में इंजीनियर के पद पर तैनात है। करीब चार साल पहले ही उनके ही परिवार का जुनैद अली (30) पुत्र मेहरबान भी इसी पद पर नौकरी के लिए सूडान चला गया था।
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डेढ़ साल पहले वह अपनी पत्नी सलमा और ढाई साल की बेटी इनायत को भी सूडान ले गया था। उनका एक रिश्तेदार सलमान पुत्र शाह आलम निवासी मुजफ्फरनगर भी 11 महीने पहले ही सूडान गया था। जुनैद इस समय सूडान की राजधानी खार्टूम में किराए पर रह रहा था। जैसे ही सूडान में गृह युद्ध के हालात छिड़े तो परिवार के सदस्यों में बेचैनी बढ़ गई। उन्होंने सूडान में रह रहे परिजनों से हाल जाना तो उनके सूडान की हालत बताने के बाद परिजनों की बेचैनी और बढ़ गई। मंगलवार को भारतीय समय के अनुसार सुबह नौ बजे शिप में बैठकर सऊदी अरब के लिए रवाना हो गए हैं। नौ घंटे के सफर के बाद वह सऊदी अरब पहुंचेंगे। वहां से वह जहाज से इंडिया के लिए रवाना होंगे। बतौर सफदर त्यागी जैसे ही जुनैद शिप में बैठे तो खुदा के साथ ही भारत और सऊदी अरब सरकार का शुक्रिया अदा किया।
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मंजर याद कर सहम रहे परिवार के लोग



सूडान में रह रहे जुनैद और उसके परिवार के सदस्यों के दिल से अब भी वहां का मंजर नहीं जा रहा है। बारूद और गोलियों की आवाज के साथ ही धूल के गुब्बार का मंजर बार-बार आ रहा है। उनके अनुसार कई दिन पहले ही घरों की बिजली-पानी की सप्लाई बंद कर दी गई थी और वह लगातार घरों में ही कैद थे। ऐसे में उनकी वापसी की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही थी। शिप में बैठने के बाद उन्होंने राहत की सांस ली।
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