शहर से पहाड़ का सफर नहीं होने से स्थानीय यात्रियों को निराशा हाथ लग रही है। यात्रियों को संपर्क बस अड्डों पर पहुंचकर आगे की बसें पकड़ने जाना पड़ रहा है।
अक्सर समय पर बस नहीं मिलने पर यात्रियों का वक्त और किराया ज्यादा लग रहा है। दोबारा से पहाड़ी क्षेत्रों के लिए सीधी बस सेवा की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। वर्तमान में यहां से रोडवेज और निजी बसों का संचालन मुख्य रूप से देहरादून, ऋषिकेश और हल्द्वानी तक ही सीमित है।
बड़ी संख्या में यात्री श्रीनगर और नैनीताल सहित अन्य पर्वतीय रूटों के लिए सीधी बसों की जानकारी लेने रोजाना बस अड्डे पहुंच रहे हैं। पिछले कुछ सालों में शहर के भीतर पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों की संख्या में भी इजाफा हो गया है। दुर्गा कॉलोनी, ढंडेरा, सुभाष नगर और भंगेड़ी आदि क्षेत्रों में पहाड़ी जिलों के काफी लोगों के परिवार बस गए हैं। सात ताल के शहर नैनीताल जाने वालों की कमी भी स्थानीय युवाओं की कम नहीं है।
रुड़की बस अड्डे पर प्रतिदिन सैकड़ों यात्री पहाड़ी जिलों की ओर जाने के लिए आते हैं लेकिन उन्हें देहरादून या ऋषिकेश में बस बदलनी पड़ती है। इससे न केवल समय अधिक लग रहा है बल्कि अतिरिक्त किराया भी देना पड़ता है। खासकर बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवारों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
यात्रियों का कहना है कि रुड़की एक प्रमुख शैक्षणिक और औद्योगिक शहर है जहां से बड़ी संख्या में लोग पर्वतीय क्षेत्रों से जुड़े हैं। इसके बावजूद सीधी बस सेवा का अभाव समझ से परे है। स्थानीय निवासी अनिल कुमार का कहना है वह ढंडेरा में रहते है शादी समारोह व पर्व आदि अवसरों में अपने गांव श्रीनगर जाते हैं लेकिन यहां से सीधी बस नहीं मिलने से परिवार को परेशानी होती है।
देहरादून जाकर दूसरी बस पकड़नी होती है जिससे चार से पांच घंटे अतिरिक्त लग जाते हैं। यात्री रेखा ने बताया केस से जुड़े मामलों को लेकर काफी लोगों को हाईकोर्ट आना-जाना लगा रहा है लेकिन नैनीताल के लिए सीधी बस न होने से काफी दिक्कत होती है।
यहां से सुबह और शाम एक-एक बस भी चल जाए तो राहत मिलेगी। मंडलीय प्रबंधक (संचालन) सुरेश चौहान का कहना है कि चालक और बसों की संख्या बढ़ने पर नए रूट खोलने पर विचार किया जाएगा। हल्द्वानी तीन, देहरादून नौ, ऋषिकेश और कोटद्वार पर दो-दो बसों का नियमित संचालन है।