रुड़की। बगावत के बाद पहली बार मीडिया से रू-ब-रू हुए प्रदीप बत्रा ने दावा किया कि निर्वतमान प्रदेश सरकार से सिर्फ नौ विधायक असंतुष्ट नहीं थे बल्कि ऐसे विधायकों व मंत्रियों की संख्या 15 से ज्यादा है। बत्रा ने कहा कि प्रीतम सिंह चौहान गृहमंत्री रहते हुए भी किसी दारोगा का तबादला नहीं करवा पा रहे थे। विजय बहुगुणा को लंबे समय से सोनिया व राहुल गांधी ने मिलने का समय नहीं दिया। यही कारण है कि नौ विधायकों को बगावत के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि वह अगला चुनाव भाजपा के टिकट पर रुड़की से लडे़ंगे।
राष्ट्रपति शासन लगने के बाद बत्रा रुड़की पहुंचे। सोमवार को कैंप कार्यालय पर पत्रकारों से वार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि 18 मार्च के बजट में रुड़की का कहीं जिक्र तक नहीं था। लगातार उपेक्षा से तंग आकर उन्होंने यह फैसला लिया। बत्रा ने कहा कि प्रदेश में यदि भाजपा सरकार बनाती है तो वह उसे अपना समर्थन देंगे। दावा किया कि आने वाले विधानसभा चुनाव में वह भाजपा के टिकट पर रुड़की से चुनाव लडे़ंगे। पहले से टिकट की दौड़ में शामिल पूर्व विधायक सुरेश चंद्र जैन को लेकर बत्रा का कहना है कि भाजपा ने सोच समझकर ही सभी नौ विधायकों को टिकट का भरोसा दिलाया है।
कुंजवाल पर भी निशाना साधा
पत्रकारों से बातचीत में प्रदीप बत्रा ने गोविंद सिंह कुंजवाल पर भी निशाना साधा। आरोप लगाया कि कुंजवाल विधानसभा में हरीश रावत के सचिव के रूप में काम कर रहे थे। 18 मार्च को सरकार के अल्पमत में आने से उसके बाद के तमाम आदेश स्वत: निरस्त हो गए हैं। सदस्यता समाप्त करने को लेकर पत्र पर हस्ताक्षर पुरानी तारीख में किए गए थे। अधिवक्ताओं को यह पत्र राष्ट्रपति शासन लगने के बाद रिसीव कराया गया जो कि पूरी तरह गलत है।