उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में रुड़की सीट पर हुई दो बागियों के बीच चुनावी जंग में भाजपा के प्रदीप बत्रा को सियासी बगावत रास आई, लेकिन सुरेश चंद जैन को बगावत महंगी पड़ गई। दोनों ही लगातार दूसरी बार आमने-सामने चुनावी मैदान में थे, हालांकि इस बार दोनों की पार्टियां बदल गई थी। 15 साल तक भाजपा में रहे सुरेश चंद जैन इस बार कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़ रहे थे, जबकि इससे पहले कांग्र्ेस से विधायक रहे प्रदीप बत्रा बीजेपी से प्रत्याशी थे।
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में इस बार रुड़की सीट हाट बनी हुई थी। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही ओर से बागियों को मैदान में उतारा गया था। 18 मार्च 2016 को कांग्रेस सरकार से बगावत कर प्रदीप बत्रा अन्य विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हुए थे, जिसके बाद उन्हें बीजेपी से टिकट दिया गया। दूसरी ओर रुड़की सीट से दो बार के विधायक रहे सुरेश चंद जैन ने टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर बीजेपी छोड़ दी। इसके बाद कांग्रेस का हाथ थाम लिया। कांग्रेस ने भी सुरेशचंद जैन पर विश्वास जताते हुए उन्हें रुड़की से ही उम्मीदवार बनाया। दोनों बागियों के बीच चली सियासी जंग में सुरेशचंद जैन को शिकस्त का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही उनके राजनीतिक सफर पर भी प्रश्र चिह्न लग गया है, जबकि प्रदीप बत्रा ने जीत दर्ज कर बीजेपी में भी अपना कद बढ़ाया है।
जिले में कांग्रेस के दोनों बागियों ने मारी बाजी
कांग्रेस सरकार से बगावत करने वाले दस विधायकों में हरिद्वार जिले से कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन और प्रदीप बत्रा शामिल थे। दोनों ने ही बीजेपी से जीत दर्ज की है। इसके अलावा भी कांग्रेस से बगावत कर भाजपा में शामिल हुए अधिकांश प्रत्याशियों ने चुनाव में जीत दर्ज की है। इसमें हरक सिंह रावत, सुबोध उनियाल आदि शामिल हैं।