नगर में आयोजित आल इंडिया मुशायरे में शायरों ने अपने कलाम पढ़कर समां बांध दिया। देर रात तक लोग अपने पंसदीदा शायरों को सुनने के लिए डटे रहे। शायरों ने समाज में हो रहे बदलाव से लेकर सियासी हालात पर शेर कहे।
नगर की सामाजिक संस्था ‘बज्म-ए-सुखन’ ने मुशायरे का आयोजन किया। मशहूर शायर मीसम गोपालपुरी ने अपनी मशहूर गजल के शेर पढ़ते हुए कहा कि चंद लम्हे वो गुजार आया हूं। अनजानों के साथ, दिल नहीं लगता मेरा अब जाने पहचानों के साथ। शायर फाखिर अदीब ने कहा कि पत्थरों की बस्ती में दिल सजाए बैठे हैं, हम चरागे उर्दू जलाए बैठे हैं।
मशहूर शायर अल्ताफ जिया ने कहा कि एक जरा से फाद की खातिर, कितने चेहरे बदल रहे हैं लोग। खुर्शीद हैदर ने कहा कि मेरी जानिब मोहब्बत से न देखो, मेरी मोहब्बत पर ज्वाल आया हुआ हैं। इसके अलावा नदीम शाद, काशिफ गुल, चौकस देवबंदी, ताजदार मंगलौरी जीनत, बरकत हौलट आदि शायरों ने अपने कलाम पेश कर वाहवाही लूटी।
मुशायरे में पूर्व विधायक निजामुद्दीन, पालिका अध्यक्ष चौधरी इस्लाम, सैयद अली हैदर जैदी, शाहनवाज, बाबू भाई, खलील अहमद, नसीम, यामीन, शमीम मंगलौरी अबरार, मंसूर, मजाहिर, अवैश, खालिद, फ्यूज, साकिब, असलम आदि मौजूद रहे।