जलवायु-स्मार्ट और सतत कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में आईआईटी रुड़की ने उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि निदेशालय और दो निजी कंपनियों के साथ दो त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह पहल ‘कार्बन क्रेडिट इनिशिएशन एंड इट्स बेनिफिट्स फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर इन उत्तर प्रदेश’ कार्यक्रम के तहत शुरू की गई है। इसका उद्देश्य किसानों को कार्बन क्रेडिट बाजार से जोड़ना और पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देना है।
इस परियोजना के तहत उत्तर प्रदेश में तकनीक आधारित, पारदर्शी और किसान-केंद्रित कार्बन क्रेडिट ईकोसिस्टम विकसित किया जाएगा। कार्यक्रम में जलवायु-स्मार्ट कृषि, मृदा जैविक कार्बन में वृद्धि, जल संरक्षण, सिंचाई दक्षता सुधार, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी, कृषि वानिकी और जैव विविधता को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
साथ ही किसानों को कार्बन वित्त और उभरते कार्बन बाजारों में भागीदारी का अवसर मिलेगा। आईआईटी रुड़की इस परियोजना में तकनीकी एवं वैज्ञानिक नोडल एजेंसी की भूमिका निभाएगा। संस्थान वैज्ञानिक मूल्यांकन, डिजिटल मॉनिटरिंग, रिपोर्टिंग एवं वेरिफिकेशन (डी-एमआरवी) फ्रेमवर्क, अनुसंधान और क्षमता निर्माण में सहयोग करेगा। परियोजना में सैटेलाइट इंटीग्रेशन, जीआईएस मैपिंग, जीपीएस आधारित फील्ड सिस्टम, मोबाइल एप, आईओटी और डिजिटल डैशबोर्ड जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
आईआईटी निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने कहा कि यह साझेदारी सतत कृषि, जलवायु लचीलापन और किसानों के लिए नए आर्थिक अवसर सृजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। प्रारंभिक चरण में सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली जिलों के पांच लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को इस कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इस मौके पर प्रो. विवेक कुमार मलिक, नोडल अधिकारी डॉ. एएस मौर्य भी मौजूद रहे।