विगत विधानसभा चुनाव में निर्दलीय मुस्लिम उम्मीदवार भाजपा की जीत का कारण बना था, जबकि मुस्लिम वोटों के बिखराव के कारण बसपा के उम्मीदवार हाजी तसलीम दूसरे स्थान पर रहे थे। वहीं इस बार बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ते हैं तो एक बार फिर से भाजपा की राह आसान हो सकती है, हालांकि इसके लिए अभी कांग्रेस से उम्मीदवार के घोषित होने का इंतजार करना पड़ेगा। जिसके बाद स्थिति काफी हद तक साफ होने की उम्मीद है।
विगत विधानसभा चुनाव में भाजपा के संजय गुप्ता और बसपा के पूर्व विधायक हाजी तसलीम के बीच कांटे का मुकाबला था लेकिन मुस्लिम बिरादरी से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव लड़े ताहिर हसन ने वोटों में सेंधमारी कर करीब दस हजार वोट हासिल कर लिए थे। इतने ही वोट से भाजपा के उम्मीदवार संजय गुप्ता को जीत हासिल हुई और बसपा के हाजी तसलीम को हार का मुंह देखना पड़ा।
यह कहना गलत नहीं होगा कि इस बार भी कमोबेश वही स्थिति बनती दिख रही है। अंतर है तो सिर्फ इतना कि पिछली बार निर्दलीय प्रत्याशी ताहिर हसन ने बसपा के वोट बैंक में सेंधमारी की थी, इस बार बसपा से टिकट नहीं मिलने के कारण खुद हाजी तसलीम बतौर निर्दलीय उम्मीदवार बसपा के वोटबैंक में सेंधमारी कर सकते हैं। ऐसे में पिछले विधानसभा चुनाव की ही तरह एक बार फिर से भाजपा इस समीकरण को लाभ लेने की कोशिश करेगी। हालांकि अभी कांग्रेस की ओर से उम्मीदवार को लेकर ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। कांग्रेस के प्रत्याशी घोषित होने के बाद यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि भाजपा को पिछले साल के मुकाबले कितना नफा नुकसान होगा।
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