हरिद्वार जिले में दूसरी बार प्रशासकों का कार्यकाल समाप्त हो गया है। ऐसे में जिले की 306 ग्राम पंचायतों में इस समय न तो प्रधान हैं और न ही प्रशासकों के हाथ कमान। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव लगातार पीछे खिसकने से बड़ा सवाल यह है कि ग्रामीण अपनी समस्याएं किसे सुनाएं। यदि वे निवर्तमान ग्राम प्रधान के पास जाते हैं तो वे किसी भी काम को करवाने में असमर्थता जता देते हैं जबकि प्रशासक कार्यकाल खत्म होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
हरिद्वार जिले में 28 मार्च 2021 को ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो गया था। इसके बाद ग्राम प्रधानों के बस्ते जमा होने पर हर ब्लॉक में छह महीने के लिए प्रशासकों की नियुक्ति कर दी गई थी। इन छह महीनों में पंचायत चुनाव नहीं होने पर अक्तूबर 2021 में प्रशासकों का कार्यकाल पूरा हो गया। उस दौरान विधानसभा चुनाव नजदीक आने के चलते दोबारा पंचायतों की कमान प्रशासकों के हाथों में दे दी गई। अब 29 मार्च 2022 को प्रशासकों का कार्यकाल फिर से पूरा हो गया है।
वहीं, अभी पंचायत चुनाव में काफी समय शेष है। ऐसे में ग्राम पंचायतों में न तो प्रधान हैं और न ही प्रशासक। इसी महीने वित्तीय वर्ष शुरू हुआ है। वित्तीय वर्ष की शुरुआत में विभिन्न विभागों की योजनाओं का लाभ लेने के लिए ग्रामीणों को जमीन की नकल से लेकर अन्य प्रमाणपत्रों की जरूरत पड़ती है। ग्रामीण निवर्तमान प्रधान के पास जाते हैं तो वे असमर्थता जता देते हैं। प्रशासक कार्यकाल समाप्त होने का हवाला देते हैं। ऐसे में ग्रामीण अपनी फरियाद किसे सुनाएं, यह बड़ा सवाल है।
विकास कार्यों पर भी लगी रोक
ग्राम पंचायतों में एक साल से प्रधानों का कोई हस्तक्षेप नहीं है। भले ही प्रशासक गांव में तैनात हों लेकिन वे नए विकास कार्य शुरू नहीं करवा रहे हैं। अब नया वित्तीय वर्ष शुरू हो गया है। ऐसे में नए बजट के साथ गांव में नए विकास कार्यों के प्रस्ताव बनने थे लेकिन प्रधानों का चुनाव नहीं होने से नए विकास कार्यों के प्रस्ताव नहीं बन पा रहे हैं। इसको लेकर ग्रामीणों में रोष है। रसूलपुर निवासी साजिद और उस्मान का कहना है कि सरकार और प्रशासन पंचायत चुनाव को बार-बार टाल रहा है। इससे ग्रामीणों को भारी समस्याएं उठानी पड़ रही है। वहीं, एडीओ पंचायत बिजेंद्र सैनी ने बताया कि ग्रामीणों के जरूरी कामों को कराने का प्रयास किया जा रहा है।