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अभिभावकों और अभाविप  का एबीएन में हंगामा 

Tue, 03 May 2016 11:16 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
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एबीएन स्कूल के छात्रों को फेल करने के विरोध में एबीवीपी ने किया हंगामा - फोटो : amarujala
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आदर्श बाल निकेतन (एबीएन) आईआईटी रुड़की में मंगलवार को 35 बच्चों को मनमाने तरीके से फेल करने का आरोप लगाते हुए अभिभावकों एवं अभाविप नेताओं ने जमकर हंगामा किया। धरना देकर नारेबाजी की। मौके पर पहुंची पुलिस को भी भारी विरोध का सामना करना पड़ा। फेल छात्रों की दोबारा परीक्षा कराने या फिर दसवीं में प्रमोट करने की मांग का प्रधानाचार्य और प्रबंधक ने राहत देने से इंकार कर दिया। बवाल के बाद प्रबंधन ने बुधवार को देहरादून स्थित बोर्ड कार्यालय पहुंचकर समस्या का समाधान कराने का आश्वासन दिया। 
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एबीएन में कक्षा नौ के 54 छात्र फेल थे ।  री-एग्जाम में भी 35 छात्र फेल हुए। जिसे लेकर करीब दो सप्ताह पूर्व अभिभावकों ने स्कूल में हंगामा किया था तब प्रबंधन ने प्रत्येक अभिभावक से सीबीएसई बोर्ड के नाम एक प्रार्थना पत्र लिखवाया। जिसमें फिर से एक परीक्षा का आयोजन कराने की मांग की। साथ ही प्रबंधन ने आश्वासन दिया कि दोबारा एग्जाम कराकर बच्चों को राहत दे दी जाएगी। अब मंगलवार को अभाविप कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे अभिभावकों ने आरोप लगाया कि वे दस दिन से प्रबंधक से मिलने के लिए चक्कर काट रहे हैं। उन्हें यह तक नहीं बताया जा रहा है कि स्कूल ने क्या निर्णय लिया है। इसके बाद हंगामा कर रहे लोगों की प्रधानाचार्य राजबीर सिंह के साथ तीखी नोकझोंक हुई। अभाविप नेताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद वार्ता के लिए पहुंचे प्रबंधक बीएस डेनियल से भी बहस होने लगी। लेकिन दोनों ने ही राहत देने से साफ इंकार कर दिया। इस दौरान अभिभावकों के विरोध के सामने पुलिसकर्मियों के तेवर भी ढीले पड़ गए। आखिर में अभिभावकों को बमुश्किल इस बात पर राजी किया गया कि बुधवार को स्कूल प्रशासन के साथ अभिभावकों को देहरादून स्थित बोर्ड आफिस ले जाकर समस्या का समाधान कराया जाएगा। 

खुद चैक कर खुद ही कर दिया फेल 
अभिभावकों ने आरोप लगाते हुए कि स्कूल प्रशासन ने सीबीएसई बोर्ड के नियमों के विपरीत री-एग्जाम के नाम पर प्रत्येक विषय के 300 रुपये लिए हैं। जिसकी रसीद दी गई लेकिन बाद में रसीद वापस ले ली गई। एक अभिभावक ने रसीद वापस नहीं लौटाई थी। उन्होंने प्रबंधक के सामने वह रसीद दिखाई। जिस पर प्रबंधक डेनियल ने पैसा वापस कराने का भरोसा दिलाया। इस दौरान अभिभावकों का कहना था कि शिक्षकों ने जानबूझकर छात्रों को फेल किया है। कई बच्चों को एक-एक अंक से ही फेल किया गया है। 
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सीबीएसई स्कूलों में उपेक्षित हिंदीभाषी अभिभावक
भले ही देश में हर साल हिंदी को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रमों के आयोजन में लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हो। लेकिन सीबीएसई बोर्ड के स्कूलों में हिंदी को उपेक्षा के तौर पर लिया जाता है। हंगामा कर रहे कुछ अभिभावकों ने अपने दिल का दर्द बयां किया। इनका कहना था कि अंग्रेजी नहीं बोल पाने वाले ज्यादातर अभिभावक स्कूल आने से कतराते हैं। बुलाने पर पहुंचते भी हैं तो शिक्षक हिंदी में बात करने को राजी नहीं होते। जिससे मीटिंग में दिए जाने वाले दिशा निर्देश समझ से परे हो जाते हैं। अभिभावकों का कहना था कि शिक्षको को अभिभावकों की बैठक में अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी में भी जानकारी देनी चाहिए। 

अभिभावकों ने पूछा, एक कक्षा में 70 बच्चे क्यों 
जिस समय प्रबंधक बीएस डेनियल अभिभावकों को सीबीएसई बोर्ड के नियमों का हवाला देते हुए राहत देने से मना कर  रहे थे। तो एक अभिभावक ने उनसे सवाल किया कि बोर्ड का नियम है कि एक कक्षा में 50 बच्चे से अधिक नहीं हो सकते। लेकिन स्कूल में 70 से अधिक बच्चे एक क्लास में हैं। तो एक शिक्षक इतने बच्चे को कैसे ठीक ढंग से पढ़ा सक ता है। वहीं अभिभावकों ने कहा कि वे पूरे साल स्कूल को फीस देते हैं। ऐसे में अच्छी पढ़ाई की जिम्मेदारी स्कूल एवं शिक्षकों की भी है। यदि बच्चों को सजा मिल रही है तो शिक्षकों पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए। 

ये मौजूद रहे अभिभावक एवं अभाविप कार्यकर्ता 
हंगामे के दौरान अभाविप के प्रदेश सह प्रमुख गोविंद पाल कुमराडा, नगर मंत्री शुभम सैनी, जिला सह प्रमुख नितिन चौधरी, जिला संयोजक अर्जुन सिंह, नगर प्रमुख अमर चौधरी, मुकुल त्यागी, आकाश राठी, सूर्यकांत सैनी, शुभम चौधरी, अनंत शर्मा, मयंक त्यागी, विशाल गांधी, मयंक शर्मा, तरुण कुमार, अनंत पाल एवं योगेश सिंह समेत अभिभावक सरोज मलिक, संदीप सैनी, प्रभा सैनी, सुनील यादव, अनिल कुमार, सुमित, रविंद्र, संजय जैन, जीसी भट्ट एवं सरोज मेहता आदि मौजूद रहे। 
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