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Roorkee News: हजरत इमाम अली की शहादत पर उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब

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मौला-ए-कायनात, शेर-ए-खुदा हजरत इमाम अली (अलैहिस्सलाम) की शहादत के गम में बुधवार को कस्बा मंगलौर गमगीन नजर आया। मोहल्ला पठानपुरा स्थित बड़े इमामबाड़े में एक अजीम मजलिस का आयोजन किया गया। इसमें क्षेत्र के हजारों अकीदतमंदों ने शिरकत कर अकीदत के फूल पेश किए। मजलिस का संचालन बड़े इमामबाड़े के प्रबंधक काशिफ रजा नकवी ने किया। सुरक्षा के दृष्टिगत से पुलिस-प्रशासन मुस्तैद रहा ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
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मजलिस को संबोधित करने के लिए नौगामा से तशरीफ लाए प्रख्यात धर्मगुरु एवं पूर्व विधायक मौलाना जावेद आब्दी साहब ने इमाम अली (अ.स.) की सीरत पर विस्तार से रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में जो नफरत, अन्याय और हाहाकार मचा है, उसका एकमात्र समाधान इमाम अली (अ.स.) के आदर्शों में छिपा है। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी इंसाफ, सच्चाई और भाईचारे का जो पैगाम दिया, वह कयामत तक इंसानियत की रहनुमाई करता रहेगा।



मौलाना ने इमाम अली की दरियादिली का जिक्र करते हुए बताया कि जब 19 रमजान को मस्जिद-ए-कूफा में सजदे की हालत में उन पर जहरीली तलवार से वार किया गया, तब भी उन्होंने अपने कातिल के साथ नरमी बरतने और उसे शरबत पिलाने का हुक्म दिया। ऐसी मिसाल पूरी दुनिया के इतिहास में कहीं नहीं मिलती।
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मजलिस के समापन पर इमाम अली (अ.स.) का ताबूत बरामद किया गया। इस दौरान माहौल बेहद गमगीन हो गया और अजादारों की आंखों से आंसू छलक पड़े। लोगों ने कतार में होकर ताबूत की जियारत की और मुल्क में अमन-चैन व भाईचारे के लिए दुआएं मांगी। इस मौके पर मोहम्मद मियां रिजवी, अली मियां, वफा आबदी, हसनैन रजा जैदी, आसिफ नकवी, इरफान जैदी, मोहम्मद हैदर, मौलाना सिब्ते हसन मौजूद रहे।
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