ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की। प्राइवेट अस्पतालों में डॉक्टराें की हड़ताल चलते मरीज दिन भर इलाज कराने के लिए दर-दर भटकते रहे। सैकड़ों मरीज निराश लौट गए तो कइयों ने सिविल अस्पताल पहुंचकर इलाज कराया। चार दिन से चल रही हड़ताल के चलते मरीजों को इलाज कराने का कोई विकल्प नहीं दिख रहा है। निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे मरीजों के सिविल अस्पताल पहुंचने से ओपीडी भी बढ़ गई है। इससे मरीजों के सामने भारी मुश्किल पैदा हो गई है।
उत्तराखंड के निजी चिकित्सक क्लीनिकल एस्टेब्लिसमेंट एक्ट के स्थान पर संशोधित उत्तराखंड हेल्थकेयर एस्टेब्लिसमेंट एक्ट लागू करने की मांग कर रहे हैं। सोमवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, इंडियन डेंटल एसोसिएशन, आयुर्वेद चिकित्सा संघ और होम्योपैथिक चिकित्सा संघ के पदाधिकारियों ने अपने क्लीनिक बंद रखे। इसके चलते मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। मरीजों ने सिविल अस्पताल में जाकर उपचार कराया। इस दौरान सिविल अस्पताल मेें मरीजों और तीमारदारों का जमावड़ा लगा रहा। जिन लोगों ने कभी सरकारी अस्पताल में इलाज नहीं कराया, निजी अस्पताल बंद होने से उन्हें भी सोमवार को सिविल अस्पताल में अपना इलाज कराना पड़ा। ऐसे में सोमवार को अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या भी बढ़ गई। अन्य दिनों में जहां सिविल अस्पताल में 500 से 600 तक ओपीडी होती थी, हड़ताल के चलते तीन दिन से 800 और 850 तक पहुंच गयी है। वहीं रुटीन में निजी अस्पतालों में अपना चेकअप कराने वाले भी सिविल अस्पताल चेकअप कराने पहुंचे।