रुड़की/लक्सर। भैय्यादूज का पर्व शुक्रवार को शहर और देहात में धूमधाम से मनाया गया। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक बहनों के भाई के प्यार के प्रतीक माने जाने वाले इस त्योहार की धूम रही। शुभ मुहूर्त में बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र की कामना की।
भैय्यादूज त्योहार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है, इसलिए इसे यम द्वितीया भी कहते हैं। इस दिन कई जगह बहनें अपने भाई के घर पर जाती हैं तो कई जगह भाई, बहन के घर जाते हैं। दिवाली के साथ ही भाई बहन के पावन प्रेम की प्रतीक यम द्वितीया का अपना विशेष महत्व है। बहनें भाई की मंगल कामना कर अपने को धन्य मानती हैं। भैयादूज हिंदू समाज में भाई-बहन के पवित्र रिश्तों का प्रतीक है। हिंदू समुदाय के सभी वर्ग के लोग हर्षोल्लास से यह त्योहार मनाते हैं।
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भाई शगुन के रूप में बहन को देते हैं उपहार
पर्व पर जहां बहनें अपने भाई की दीर्घायु और सुख समृद्धि की कामना करती हैं तो वहीं भाई भी सगुन के रूप में बहन को उपहार स्वरूप कुछ भेंट करते हैं। इस पर्व पर बहनें गोबर से मांडना बनाती हैं, उसमें चावल और हल्दी के चित्र बनाती हैं। सुपारी, फल, पान, रोली, धूप, मिष्ठान आदि रखती हैं और दीप जलाती हैं। साथ ही इस दिन यम द्वितीया की कथा भी सुनी जाती है।
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बहनों ने व्रत रखा
बहनों ने भाई को तिलक लगाकर उनकी खुशहाली और लंबी उम्र की कामना की। साथ बहनों ने व्रत रखकर अपने भैया के लिए मंगलकामना भगवान से की। रुड़की, लक्सर, खानपुर, सुल्तानपुर, रायसी आदि ग्रामीण क्षेत्रों में पूरे दिन पर्व की चहलपहल दिखी। भैय्यादूज को लेकर छोटे बच्चों में भी खूब उत्साह रहा। भाइयों के साथ बहनों ने उल्लास के साथ पर्व मनाया।