रुड़की। बेहद कम दामों पर पुस्तकें मिलने से अभिभावकों के चेहरे खिल उठे । शुक्रवार को हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद स्कूलों की ओर से अभिभावकों को एनसीईआरटी की पुस्तकें खरीदने के लिए मैसेज कर सूचना दी गई। कुछ अभिभावकों ने स्कूलों में जाकर भी जानकारी जुटाई।
इस वर्ष एनसीईआरटी की पुस्तकों को लेकर शिक्षा विभाग और प्राइवेट स्कूल आमने-सामने आ गए थे । प्राइवेट स्कूल जहां एनसीईआरटी की पुस्तकों के साथ साइड बुक लगाने के इच्छुक थे, वहीं सरकार केवल एनसीईआरटी की पुस्तकों पर अडिग़ थी। स्कूल हड़ताल के साथ मामले को कोर्ट में चुनौती दे चुके थे। स्कूलों और सरकार के बीच चल रही खींचतान को लेकर अभिभावक असमंजस में थे कि वह एनसीईआरटी की पुस्तकों को खरीदे या नहीं। शुक्रवार को कोर्ट के फैसले ने साफ कर दिया कि आईसीएसई स्कूलों को छोड़कर सभी स्कूलों को एनसीईआरटी की पुस्तकें लागू करनी होगी। कोर्ट का फैसला आने के बाद ही शनिवार को कुछ स्कूलों ने मैसेज कर अभिभावकों से एनसीईआरटी की पुस्तकें खरीदने के लिए कहा गया। वहीं अधिकतर अभिभावक समाचार पत्रों में फैसला आने के बाद स्कूलों में पूछताछ के लिए पहुंच गये। स्कूलों से एनसीईआरटी की पुस्तकें लागू होने की जानकारी मिलते ही अभिभावक बाजार में पहुंच गये और एनसीईआरटी की पुस्तकें खरीदी। इस दौरान अभिभावकों का उस समय खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा, जब पुस्तकों का बिल अभिभावकों के हाथों में आया। अभिभावक रोबिन, तुषार, जितेंद्र, कुंवर सिंह आदि का कहना था कि छोटी कक्षाओं के बच्चों की किताबें मात्र डेढ़ सौ से दो सौ रुपयों तक आ गई। जबकि अन्य प्रकाशन की इन्हीं कक्षाओं की पुस्तकें तीन-तीन हजार तक मिलती थी।