रुड़की। न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित होने के बाद अब प्रदेश के किसानों की निगाहें बोनस पर टिकी है। केंद्र सरकार की ओर से न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित होने के बाद प्रदेश सरकार द्वारा अतिरिक्त बोनस की घोषणा की जाती है। उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने किसानों को दस रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने की घोषणा कर चुकी है।
किसानों के खेतों में गेहूं की फसल अब लगभग तैयार खड़ी है। किसानों के अनुसार अप्रैल के पहले सप्ताह में गेहूं की कटाई शुरू हो जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से गेहूं के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया जाता है। इस वर्ष केंद्र सरकार ने वर्ष विगत सत्र के सापेक्ष 110 रुपए प्रति क्विंटल का इजाफा किया गया है। इसके चलते केंद्र सरकार की ओर से इस वर्ष न्यूनतम समर्थन मूल्य 1735 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है। केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने के बाद अब राज्य सरकार अपने-अपने किसानों को अतिरिक्त बोनस देती हैं। बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने किसानों को दस रुपये अतिरिक्त बोनस देने की घोषणा की थी। इसके बाद अब प्रदेश के किसानों को अब बोनस की घोषणा का इंतजार हैं। किसान योगेंद्र पाल, सोमपाल, ऋषिपाल, ऐशपाल, बिजेंद्र, कालूरा आदि का कहना था कि प्रदेश सरकार को उत्तर प्रदेश से अधिक बोनस देना चाहिए। मुख्य कृषि अधिकारी विकेश यादव ने बताया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित हो चुका है, लेकिन बोनस को लेकर प्रदेश सरकार ने कोई घोषणा नहीं की है।
गेहूं खरीद को लेकर तैयारियां शुरू
रुड़की। केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित होने के साथ ही गेहूं खरीद की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इसके लिए सहकारी विभाग ने 21 प्रस्तावित गेहूं क्रय केंद्रों की सूची जिला अधिकारी के पास भेज दी है। जिलाधिकारी द्वारा इन गेहूं क्रय केंद्रों को घटाया या बढ़ाया जा सकता हैं। इसके साथ ही आरएफसी द्वारा भी गेहूं क्रय केंद्रों अलग से स्थापित किए जाते है। ब्यूरो
गेहूं खरीद के लक्ष्य को लेकर स्पृष्ट नहीं स्थिति
प्रत्येक वर्ष गेहूं खरीद को लेकर एक लक्ष्य रखा जाता है। सहायक निबंधक मनोज कुमार पुनेठा ने बताया कि बोनस के आदेश के साथ ही गेहूं की खरीद का लक्ष्य मिलता है। अभी तक इस बाबत कोई आदेश नहीं मिले है।
प्राइवेट आढ़तियों का बढ़ा दखल
गेहूं की फसल लगभग तैयार होने के साथ ही प्राइवेट आढ़तियों का दखल शुरू हो गया है। प्राईवेट आढ़तियों ने किसानों को गेहूं की फसल को लेकर पैसों को बाटना शुरू कर दिया है। ताकि किसानों की फसलों को औने-पौने दामों में खरीदा जा सके।