ब्यूरो/अमर उजाला, भगवानपुर
मंडी शुल्क चोरी कर देवबंद से लकड़ी से लदा ट्रक भगवानपुर में पकड़े जाने पर मंडी समिति ने संबंधित कंपनी को नोटिस दिया है। पड़ताल में सामने आया कि कई साल से ट्रक से ऐसे ही बिना मंडी शुल्क दिए माल फैक्ट्री में लाया जा रहा था।
भगवानपुर में बिजली की एबीसी केबल और अन्य उत्पाद बनाने वाली एक फैक्ट्री में सहारनपुर जिले के देवबंद से लकड़ी के फट्टे लाए जा रहे थे। इस बात की सूचना किसी ने मंडी समिति के अधिकारियों को दी। बृहस्पतिवार को मंडी समिति की टीम ने देवबंद से आ रहे ट्रक को भगवानपुर कस्बे के पास पकड़ लिया।
मंडी समिति के अधिकारियों ने जब ट्रक चालक से मंडी शुल्क से संबंधित कागजात मांगे गए तो वह दिखा नहीं पाया। पूछताछ में ट्रक चालक ने बताया कि वह कई साल से देवबंद से ऐसे ही लकड़ी बिना मंडी शुल्क अदा किए आ रही है। उसके बाद मंडी समिति ने भगवानपुर में एबीसी केबल और अन्य उत्पाद बनाने वाली फैक्ट्री प्रबंधन को नोटिस दिया गया। वहीं दूसरी ओर भगवानपुर कस्बे में आलू से भरी मैक्स पिकअप को भी मंडी समिति के कर्मचारियों ने पकड़ लिया। ये माल भी बिना मंडी शुल्क अदा दिए क्षेत्र में आ रहा था। मंडी समिति की ओर से मैक्स पर पांच हजार का जुर्माना और पांच सौ रुपये मंडी शुल्क वसूला गया। टीम में सचिव कुलदीप नौटियाल, अलकेश सैनी, राजीव आदि उपस्थित रहे।
मंडी शुल्क चोरी की सूचना पर छापामारी
भगवानपुर। कस्बे में बाहरी राज्यों से लाए गए फलों की बिक्री किए जाने की सूचना पर मंडी समिति की टीम ने मंडी सचिव के नेतृत्व में छापा मारा। इस दौरान टीम ने सेब की पेटियों से भरा एक लोडर पकड़ा। व्यापारियों के हंगामे के बाद लोडर स्वामी की ओर से माफी मांगने पर उन्हें छोड़ दिया गया। कृषि उत्पादन मंडी समिति के सचिव कुलदीप नौटियाल ने बताया कि भगवानपुर में सहारनपुर सब्जी मंडी से फल और सब्जियां लाकर बेची जा रही है। इस पर बृहस्पतिवार को मंडी समिति की टीम ने मौके पर छापा मारा। मंडी समिति के छापे पर आसपास के व्यापारियों ने हंगामा कर दिया। उसके बाद टीम सेब से लदे लोडर को मंडी समिति के कार्यालय ले आई। व्यापारी भी टीम के साथ कार्यालय में पहुंच गए। इस दौरान फल बेचने वाले व्यापारियों ने मंडी समिति के अधिकारियों के सामने अपनी गलती स्वीकार की। मंडी समिति के अधिकारियों ने व्यापारियों से भविष्य में भगवानपुर रुड़की की सब्जी मंडी से ही फल और सब्जियां खरीदने की हिदायत दी। जिस पर व्यापारी मान गए।