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प्रदूषण फैलाने पर 25 फैक्ट्रियों पर लटके ताले

Tue, 16 Feb 2016 12:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
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रुड़की। पिछले तीन वर्षों में एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) की सख्ती और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कड़े फैसले फैक्ट्रियों के प्रदूषण को ‘समाप्त’ करने में महत्वपूर्ण साबित हुए हैं। नियमित निरीक्षण करने पर पिछले वर्ष जिले की 39 औद्योगिक इकाइयों को प्रदूषण फैलाने पर बंदी के आदेश जारी किए गए। इनमें से केवल नौ फैक्ट्रियां ही मानक पूरे कर पाईं। जबकि 25 फैक्ट्रियां मानक पूरे नहीं करने पर हमेशा के लिए बंद कर दी गईं। इनके अलावा पांच फैक्ट्रियां बंदी के आदेश के खिलाफ कोर्ट से स्टे लिए हुए हैं।
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औद्योगिक इकाइयों की चिमनियों से निकलता धुआं और केमिकल युक्त पानी हवा से लेकर पानी तक में जहर घोल रहा है। यह तब है जबकि इकाइयों को स्थापना से पूर्व नियमानुसार प्रदूषण बोर्ड की स्वीकृति हासिल करनी होती है। पांच वर्ष पहले तक भगवानपुर औद्योगिक क्षेत्र में भूजल के प्रदूषित होने, हैंडपंप और ट्यूबवेल तक में झाग युक्त और बदबूदार पानी आने की शिकायतें मिल रही थी। इस जल को पीकर लोगों को गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ा। इसको लेकर समय-समय पर क्षेत्रीय लोगों ने प्रदर्शन भी किए। लेकिन पिछले तीन वर्षों में एनजीटी ने प्रदूषण को लेकर फैक्ट्रियों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया तो अब कार्रवाई भी होती दिखाई देने लगी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रुड़की स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के अनुसार वर्ष 2015-16 में जिले की करीब 350 अति प्रदूषणकारी फैक्ट्रियों का निरीक्षण किया। इनमें से 39 फैक्ट्रियों को प्रदूषण फैलाने पर बंदी के आदेश जारी किए। इसमें से नौ फैक्ट्रियों ने अपने यहां से निकल रहे प्रदूषण युक्त पानी का ट्रीटमेंट किया। उसके बाद बोर्ड से एनओसी हासिल कर फिर से उत्पाद शुरू किया। जबकि मानकों का पालन नहीं करने पर 25 फैक्ट्रियों पर ताले लगा दिए गए। इनके अलावा पांच फैक्ट्रियां बोर्ड के बंदी के आदेश के खिलाफ कोर्ट से स्टे प्राप्त कर उत्पादन कर रही हैं। फैसला आना बाकी है।

2014-15 में बंद कराई आठ फैक्ट्रियां
रुड़की। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वर्ष 2013-14 में 37 फैक्ट्रियों का मानक पूरे नहीं करने पर सख्ती की थी। उसके बाद 27 फैक्ट्रियों ने मानकों के अनुरूप ट्रीटमेंट प्लांट लगाए। जबकि निष्कासित प्रदूषित जल का ट्रीटमेंट नहीं करने पर दस फैक्ट्रियों पर ताले लगा दिए गए। वर्ष 2014-15 में फिर निरीक्षण किया गया और प्रदूषण फैला रही 30 फैक्ट्रियों के खिलाफ बंदी की कार्रवाई की गई। इनमें से आठ फैक्ट्रियों को मानक पूरे नहीं करने पर पूरी तरह से बंद करा दिया गया।
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इनका कहना है
2015-16 में 39 फैक्ट्रियों के खिलाफ बंदी की कार्रवाई की गई है। इनमें से नौ फैक्ट्रियों ने मानक पूरा किए। उसके बाद इन फैक्ट्रियों को संचालन की अनुमति दी है। जबकि 25 फैक्ट्रियां पूरी तरह से बंद कर दी गई है। फैक्ट्रियों के खिलाफ नियमित निरीक्षण और कार्रवाई जारी रहेगी।
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-डा. अंकुर कंसल, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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