रुड़की। इस वर्ष अक्षय तृतीय पर सोने की चमक फीकी रही। रुड़की में एक करोड़ के करीब कारोबार हुआ है। पिछले साल यह आंकड़ा 10 करोड़ से ज्यादा था। कम बिक्री से सर्राफा कारोबारियों को जोर का झटका लगा है। कारोबारी इसको लेकर जीएसटी व नगदी संकट को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन शुभ कार्य करने के लिए कोई मुहूर्त निकालने की आवश्यकता नहीं होती है। साथ ही इस दिन सोना खरीदना बहुत शुभ माना जाता है। सोना खरीदने से घर में समृद्धि आती है। बीते सालों में लोगों में अक्षय तृतीया का महत्व बढ़ा है। हर वर्ष अक्षय तृतीया पर सर्राफा कारोबार बढ़ता रहा है। पिछले साल दस करोड़ से ज्यादा का सोना बिका था। इस साल भी सर्राफा कारोबारी बेहतर बिक्री की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन इस वर्ष इसका उल्टा हो गया। सिर्फ एक करोड़ का ही कारोबार हुआ। इस साल बहुत कम बिक्री ने दुकानदारों के होश उड़ा दिए। दुकानदारों के मुताबिक नाम मात्र की बिक्री हुई। कई दुकानदारों के अनुसार तो दुकान की सजावट का खर्च तक नहीं निकल सका। वहीं ज्यादा बिक्री को लेकर जो स्टाक किया था वह अलग उनके लिए मुसीबत बन गया है। कम कारोबार के लिए सर्राफा करोबारी इसके लिए सीधे तौर पर जीएसटी व कैश की किल्लत को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। गौरतलब है कि कुछ दिनों से नकदी का संकट छाया है। इसके चलते शहर के लगभग सारे एटीमएम शोपीस बन कर रह गए हैं।
कैशलेस ग्राहकों ने ही की खरीददारी, नगद के इक्का दुक्का
सर्राफा कारोबारियों के अनुसार जो ग्राहक सोना खरीदने आए। उनमे से लगभग सभी ने कार्ड या चेक के माध्यम से खरीदारी की है। कैश के इक्का दुक्का ग्राहक ही आए हैं। पिछले साल कैश सोना खरीदने वाले ग्राहकों की अच्छी संख्या थी। ज्वैलर्स मालिकों के मुताबिक जब एटीएम में पैसा ही नही है तो आदमी कैसे खरीदारी करे।
अक्षय तृतीया पर जीएसटी व नगदी संकट के कारण सोना की कम बिक्री हुई है। सर्राफा कारोबारियों को इसकी कतई उम्मीद नहीं थी। ज्वैलर्स को बड़ा झटका लगा है।
-- विजय चौहान, अध्यक्ष सर्राफा एसोसिएशन
इस साल अक्षय तृतीया पर पिछले वर्ष की अपेक्षा कम कारोबार हुआ है। सुबह ग्राहकों की संख्या ठीक थी, लेकिन दोपहर बाद इक्का दुक्का ही ग्राहक शोरूम आए।
मोहित, तनिष्क शोरूम संचालक