रुड़की। फीस वृद्धि के विरोध में अभिभावकों का गुस्सा भड़क गया। स्कूल पहुंचे अभिभावकों ने शिक्षकों को जमकर खरी खोटी सुनाई। अभिभावकों का कहना था कि प्राइवेट स्कूल सरकार के आदेश के बाद भी राहत नहीं बल्कि आहत कर रहे हैै। अभिभावकों ने मौके पर हंगामा करते हुए अपनी मांगों से विद्यालय को अवगत कराया, लेकिन करीब चार घंटे तक चले हंगामे के बीच कोई निर्णय नहीं हो पाया। अब शुक्रवार को विद्यालय प्रबंध समिति और अभिभावक समिति के मध्य संयुक्त वार्ता होगी।
ज्ञात हो कि आनंद स्वरूप आर्य विद्या मंदिर में पिछले रविवार को फीस वृद्धि को लेकर अभिभावकों ने जमकर हंगामा किया था। जिसके बाद विद्यालय के प्रधानाचार्य ने रविवार तक का समय मांगा था। आज रविवार को एक बार फिर अभिभावक स्कूल में एकत्र हो गये। इस दौरान विद्यालय के प्रधानाचार्य का कहना था कि कक्षाओं में डेढ़ से पंद्रह प्रतिशत फीस बढ़ाई गई थी। बाद में अभिभावकों को राहत देते हुए अधिकतम फीस सात प्रतिशत कर दी गई है, लेकिन अभिभावकों का इस मामले में कुछ और ही कहना था। उनका आरोप था कि एक कक्षा की फीस 1600 से बढ़ाकर 2400 की गई थी, जिसमें मामूली सी छूट देते हुए 150 रुपये कम किया गया है। जिस पर वह राजी नहीं है। इसके साथ ही अभिभावकों ने कई तरह के आरोप लगाए। करीब चार घंटे तक चले हंगामे के बीच कोई निर्णय नहीं हो सका। जिसके बाद मौके पर 21 अभिभावकों की एक समिति गठित की गई, जो शुक्रवार को विद्यालय प्रबंधक समिति के तीन सदस्यों से वार्ता करेगी। जिसके बाद अभिभावक हंगामा शांत कर निकल गये। इस दौरान विनोद चौधरी, अजनेश, ज्योति, विनीत शर्मा, विनेश कुमार, रोशन कुमार, अमित, नवीन कुमार, रविपाल, मनवीर सिंह, सतपाल सिंह, सेवाराम, अजय सिंह, पप्पू आर्य आदि लोग मौजूद रहे।
शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे तक भी पहुंचा मामला -
हंगामे के दौरान एक अभिभावक ने फोन पर फीस वृद्धि के साथ-साथ वार्षिक शुल्क की भी शिकायत अरविंद पांडे से की। आरोप था कि विद्यालय फीस वृद्धि के साथ-साथ करीब आठ हजार रुपये वार्षिक शुल्क लिया जा रहा है। जिस पर शिक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया कि वार्षिक शुल्क नहीं लिया जाता है। अत: अभिभावक वार्षिक शुल्क जमा न कराएं। वहीं दूसरी ओर प्रधानाचार्य राजीव गुप्ता ने बताया कि यदि इस वर्ष सरकार की ओर से वार्षिक शुल्क प्रतिबंधित किया गया है, तो अभी तक इस बाबत कोई शासनादेश नहीं आया है। यदि शासनादेश मिलता है, तो वार्षिक शुल्क नहीं लिया जाएगा।
अभिभावकों ने ये रखी मांगें-
1. वार्षिक शुल्क समाप्त किया जाए।
2. बस का किराया ग्यारह माह का लिया जाए।
3. सीबीएसई के नियमानुसार एक लड़की की फीस माफ होनी चाहिए।
4. अभिभावक संघ का गठन किया जाए।
अभिभावक से घंटों वार्ता हुई है, लेकिन अभिभावकों की मांगों को लेकर कोई सहमति नहीं बन पाई है। शुक्रवार को अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधक समिति के बीच वार्ता होगी।
- राजीव गुप्ता, प्रधानाचार्य
स्कूलों में सुरक्षा के नाम पर भी खिलवाड़
रुड़की। स्कूलों में जहां एनसीईआरटी और फीस वृद्धि आदि के मामले में अभिभावक पूरी तरह जागरूक नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर की जा रही लापरवाही की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। शहर के अधिकतर स्कूलों में फायर एक्सटिंग्यूसर (फायर सिलेंडर) नहीं लगाए गए हैं। जिन स्कूलों में यह लगाए भी गए है, उनकी वैधता समाप्त हो चुकी हैं।
इस वर्ष एनसीईआरटी और फीस वृद्धि का मुद्दा खासा गरम रहा है। अभिभावक छुट्टी अनियमितताओं पर भी खुला विरोध कर रहे है। इन सबसे अभिभावकों को कुछ फायदा तो होगा, लेकिन अभिभावकों को कुछ और जागरूक होना होगा। सरकार के नियमानुसार स्कूलों में फायर बिग्रेड से एनओसी लेनी होती है। स्कूलों और बच्चों को लाने ले जाने के वाहनों में भी फायर सिलेंडर होना चाहिए, लेकिन शहर के कुछेक विद्यालयों को छोड़कर अधिकतर में फायर सिलेंडर नहीं लगाये गए हैं, जिन स्कूलों में फायर सिलेंडर लगाए भी गए है। उनकी वैद्यता समाप्त हो चुकी है। रविवार को ऐसा मामला आनंद स्वरूप आर्य विद्या मंदिर में देखने को मिला। फायर सिलेंडर की वैधता 22 फरवरी को समाप्त हो गई थी, लेकिन इसके बाद आज तक भी इस पर विद्यालय प्रबंधन ने कोई ध्यान नहीं दिया। इन सुरक्षा मानकों के ऊपर भी अभिभावकों को जागरूक होना होगा।
सीबीएसई बोर्ड की ओर से सभी स्कूलों को अग्नि सुरक्षा के उपाय किये जाने के बाबत निर्देश दिये है। जिसके चलते अब स्कूल आवेदन करने के लिये कार्यालय पहुंच रहे है। जल्द ही सभी स्कूलों का निरीक्षण करने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अनिल त्यागी, अग्नि शमन अधिकारी, रुड़की