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दस करोड़ में से महज 24 लाख का कमीशन जारी किया

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रुड़की। शुगर मिलों पर इकबाल पुर गन्ना समिति का विकास कमीशन के रूप में करीब दस करोड़ रुपये बकाया चल रहा है। इनमें से मिलों ने हाल ही में महज 24 लाख 60 हजार रुपये जारी किया है। इस भुगतान से समिति को कुछ राहत तो मिली है, लेकिन यह कमीशन ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है। बताया गया है कि विगत 2012 से करोड़ों का कमीशन बकाया चल रहा है। समय से कमीशन नहीं मिलने के कारण समिति की हालत खस्ता है।
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शुगर मिल, गन्ना समितियों के माध्यम से किसानों का गन्ना खरीदती है। इसी लिए शुगर मिल समितियों को कमीशन दिया जाता हैं, लेकिन शुगरमिल, गन्ना समितियों का विकास कमीशन दबाए बैठी हैं । आंकड़ों पर नजर डाले तो 2012-13 इकबालपुर समिति का लक्सर, लिब्बरहेड़ी,इकबालपुर शुगर मिलों पर करीब दो करोड़ 54 लाख रुपया बकाया है। इसके साथ इकबालपुर शुगर मिल पर सत्र 2013-14 का 86 लाख रुपये बकाया है । इस सत्र का लक्सर, डोईवाला और लिब्बरहेड़ी का विकास कमीशन फाइनल हो चुका है। सत्र 2014-15 का इकबालपुर समिति का चारों मिलों पर तीन करोड़ 74 लाख बकाया है। सत्र 2015-16 का भी इकबालपुर समिति का चारों शुगरमिलों पर एक करोड़ 86 लाख रुपया बकाया है। सत्र 2016-17 के पेराई सत्र का चारों शुगर मिलों पर दो करोड़ 51 लाख रुपया बकाया है। पिछले दिनों शुगर मिलों द्वारा भुगतान जारी न होने पर विभागीय अधिकारी सख्त हो गए थे। जिसके चलते इकबालपुर गन्ना समिति को डोईवाला शुगरमिल ने चार लाख 60 हजार, इकबालपुर शुगरमिल ने पंद्रह लाख और लिब्बरहेड़ी पांच लाख का विकास कमीशन दिया है। जिसके चलते इकबालपुर गन्ना समिति को थोड़ी राहत मिली है, लेकिन यह कमीशन ऊंट के मूंह में जीरा साबित हो रहा है। इसके साथ ही जिले की अन्य गन्ना समिति लक्सर, ज्वालापुर, लिब्बरहेड़ी का भी शुगरमिलों पर करोड़ों रुपया बकाया है।
दो वर्ष का देना था सरकार को विकास कमीशन
इसमें से प्रदेश सरकार ने शुगरमिलों को राहत देने के लिए दो साल का विकास कमीशन समितियों को देने का वादा किया था, लेकिन इसमें से कुछ विकास कमीशन समितियों को दिया गया है, लेकिन अधिकतर विकास कमीशन सरकार ने भी दबा कर रखा हुआ है। डीसीओ आशीष नेगी ने बताया कि शुगरमिलों ने पिछले माह कुछ विकास कमीशन जारी किया था, लेकिन इस बार फिर से शुगर मिलों ने कमीशन नहीं दिया है। जिसके चलते जल्द ही फिर से शुगरमिलों के साथ विकास कमीशन को लेकर बैठक की जाएगी।
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